कोरोना की दूसरी लहर के बीच वोटों की गिनती में अफसर व कार्मिकों के चेहरे पर आशंका की लकीरें साफ झलकती है। बातचीत में पहले कोविड संक्रमण से हो रही मौतों की चर्चा कर रहे हैं उसके बाद मतगणना पर चर्चा होती है। कहते हैं अपने को सुरक्षित रखने की कोशिश के बीच मतगणना तो करानी ही है। इसमें फील्ड के साथ ही मतगणना कक्षों में वोटों की गिनती कर रहे कार्मिक सभी हैं।
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मतगणना स्थल का एक दृश्य।
- फोटो : amar ujala
जिले में पंचायत मतदान के बाद कई शिक्षकों की मौत हो चुकी है। विकास भवन सहित अन्य विभागों के कर्मचारी भी असमय काल के गाल में समा गए हैं। जिले के कई अफसर और उनके परिजन भी कोरोना पॉजिटिव होने के बाद इससे जंग लड़ रहे हैं।
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मतदान केंद्र का एक दृश्य
- फोटो : amar ujala
ऐसे में मतगणना के प्रति जो उत्साह अतीत में अफसरों और कर्मचारियों में देखने को मिलता था वह इस बार नहीं दिखाई पड़ रहा है, लेकिन मतगणना गतिमान है। मतगणना की रफ्तार धीमी होने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है।
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मतगणना स्थल के बाहर का दृश्य।
- फोटो : amar ujala
हाल यह है कि मतगणना स्थल पर मौजूद अफसरों से बात की जाए या फिर वह स्वयं दूसरे अफसर से बात करते हैं तो सबसे पहले उनके अंदर चल रही कोविड संक्रमण की स्थिति और अफसरों व कर्मचारियों की मौत की चर्चा जुबान पर फूट पड़ती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
नाम छापना उचित नहीं होगा लेकिन ब्लॉकों के रिटर्निंग अफसर तक कोविड के दौरान मतगणना से सहमे हैं। कर्मचारी तो भय और आशंका के बीच ही काम कर रहे हैं। चर्चा में अफसर से कर्मचारी तक कहते हैं कि मतगणना स्थल पर हजार की भीड़ के बीच अपने को सुरक्षित रख पाना बड़ी चुनौती है। कहा तो सभी कर्मचारियों से गया है कि अपने को सुरक्षित रखते हुए मतगणना करें।