चुनाव से ऐन पहले समाजवादी पार्टी में लड़ाई अब आर या पार की हो चली है। मुख्यमंत्री का चुनाव विधायक दल की बैठक में किए जाने संबंधी शिवपाल सिंह यादव के बयान और सीएम अखिलेश यादव द्वारा पार्टी मुखिया मुलायम सिंह को 360 उम्मीदवारों की सूची सौंपे जाने से पार्टी में घमासान बढ़ गया है। सपा सुप्रीमो ने टिकट वितरण पर सर्वमान्य फॉर्मूला न निकाला तो जंग निर्णायक दौर में पहुंच सकती है।
टिकट वितरण में अनदेखी पर सार्वजनिक तौर पर पीड़ा जाहिर कर चुके मुख्यमंत्री अखिलेश की सलाह के बिना ही प्रत्याशियों की घोषणा का सिलसिला जारी है। सपा अब तक 175 प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। अखिलेश को इनमें से दो दर्जन नामों पर गंभीर आपत्ति है। उनके नजदीकी समझे जाने वाले एक दर्जन उम्मीदवारों के टिकट भी काटे जा चुके हैं। इस बीच, प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल ने कह दिया है कि 2017 में चुनाव जीतने पर मुख्यमंत्री का फैसला विधायक दल की बैठक में होगा।
अभी तक वे अखिलेश को सीएम बनाए जाने और खुद इसका प्रस्ताव रखने की बात कह रहे थे। वे इसके लिए शपथपत्र तक देने को तैयार थे। इस बीच, संगठन के स्तर पर ऐसे जिलाध्यक्षों को हटाया जा रहा है जो अखिलेश के करीबी रहे हैं। अखिलेश समर्थकों को कहना है कि संगठन में मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं।
ताजा मामला सीतापुर की बिसवां सीट के विधायक रामपाल यादव का निष्कासन वापस लिए जाने का है। लखनऊ और सीतापुर में अवैध निर्माण ढहाए जाने पर रामपाल ने मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, अखिलेश समर्थक चार एमएलसी समेत निष्कासित युवा नेताओं की पार्टी में अभी तक वापसी नहीं हुई है।
अखिलेश की सूची पर शीर्ष नेताओं की चुप्पी
अखिलेश ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को रविवार को प्रत्याशियों की जो सूची सौंपी है, उस पर सपा के शीर्ष नेता चुप्पी साधे हुए हैं। मुलायम और शिवपाल के बीच सोमवार को इस मुद्दे पर लंबी बातचीत हुई, पर दोनों ने अपना रुख स्पष्ट नहीं किया।