केस 1 :
40 लाख का नम्मो शौचालय बगैर इस्तेमाल जमींदोज
चारबाग पर आईआरसीटीसी ने प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर 40 लाख रुपये का नम्मो शौचालय दिया है। स्थिति यह है कि इस शौचालय का इस्तेमाल किए बिना ही जमींदोज कर दिया गया। रेलवे ने दलील दी कि यह गलत तरीके सेे बनाया गया था और उसके गंदे पानी के निकासी की समस्या थी। सरकुलेटिंग एरिया में नम्मो शौचालय काम कर रहा है।
केस 2 :
कबाड़ियों ने ठप कर दीं बॉटल क्रशर मशीनें
पानी की प्लास्टिक बोतलों के लिए आईआरसीटीसी ने बॉटल क्रशर मशीनें दी थीं। इन्हें प्लेटफॉर्मों पर लगाया गया। कबाड़ बेचने वाले इनमें बोतलों को क्रश कर प्लास्टिक वेस्ट निकालने लगे। क्षमता से अधिक मशीनों का प्रयोग होने से वे खराब हो गईं। आईआरसीटीसी ने चार मशीनें दी थीं, दो खराब हो गईं। एक मशीन सवा लाख की थी।
केस 3 :
खड़ी-खड़ी जर्जर हो गईं गोल्फ कार्ट
चारबाग पर दो गोल्फ कार्ट बुजुर्गों व दिव्यांग यात्रियों के लिए दी गईं। बताया गया कि कम क्षमता की बैटरी लगी होने से सबवे से प्लेटफॉर्म पर चढ़ नहीं पाती थीं। कार्ट को पार्सलघर में खड़ा कर दिया गया। वे कंडम हो गईं। अब आईआरसीटीसी तेजस एक्सप्रेस के स्टाफ के लिए मरम्मत करवा रही है। दोनों कार्ट की कीमत 5.40 लाख रुपये थी।
चाहे गोल्फ कार्ट हो बॉटल क्रशर मशीनें हों या नम्मो टॉयलेट, ये सब चारबाग रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सहूलियत के लिए दी गई थीं, लेकिन फिलहाल इसका फायदा नहीं मिल रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
भारतीय रेलवे खानपान व पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने सोशल कॉरपोरेट रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत चारबाग स्टेशन पर यात्रियों के लिए व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गईं। यह डिप्टी एसएस कॉमर्शियल के कमरे के बाहर रखी रहती हैं और जरूरत पड़ने पर पैसेंजर इन व्हीलचेयरों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इनकी स्थिति भी खराब हो रही है। ऐसे ही आईआरसीटीसी ने दो नम्मो शौचालय दिए। इन पर करीब 80 लाख रुपये खर्च हुए। पहला शौचालय सरकुलेटिंग एरिया में बनाया गया, जबकि दूसरा प्लेटफॉर्म नंबर चार पर। रेलवे प्रशासन की ओर से चार नंबर पर बने शौचालय को तुड़वा दिया गया। इससे 40 लाख रुपये बर्बाद हो गए। आईआरसीटीसी ने गोल्फ कार्ट भी दीं, जो जर्जर हो गईं।
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गोल्फ कार्ट
- फोटो : अमर उजाला
मुफ्त सेवा के लिए करना पड़ रहा भुगतान: चारबाग स्टेशन पर अभी जो गोल्फ कॉर्ट काम कर रही हैं, उससे सफर करने पर प्रति यात्री 50 रुपये का भुगतान करना पड़ता है, जबकि पूरी कार्ट बुक करने पर दो सौ रुपये देने पड़ते हैं। ऐसे ही बॉटल क्रशर मशीनें न होने से पैसेंजर पानी की खाली बोतलों को ट्रैक तक पर फेंक देते हैं और शौचालय की समस्या रेलवे प्लेटफॉर्मों पर पुरानी है।
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बॉटर क्रशर मशीन
- फोटो : अमर उजाला
मेंटेनेंस को लेकर फंसा था पेंच
आईआरसीटीसी की ओर से रेलवे प्रशासन को तोहफे में यात्री सुविधाओं के लिए गोल्फ कॉर्ट, बॉटल क्रशर मशीनों को तो उपलब्ध करा दिया गया, पर इसके मेंटेनेंस को लेकर पेच फंसा रहा। मेंटेनेंस पर आपसी सामंजस्य नहीं बन सका, जिसके अभाव में ये सुविधाएं काम नहीं आ सकीं।
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नम्मो शौचालय
- फोटो : अमर उजाला
कोई कोताही नहीं बरती गई
आईआरसीटीसी की ओर से सीएसआर में दी गईं यात्री सुविधाओं की देखरेख में कोई कोताही नहीं बरती जाती है। कुछ जगहों पर समस्याएं आ रही हैं, उन्हें आपसी बातचीत से सुलझाया जा रहा है। - दीपक कुमार, सीपीआरओ उत्तर रेलवे