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बेनी प्रसाद वर्मा ने दोस्ती के लिए छोड़ दी थी मुख्यमंत्री की कुर्सी, नहीं बनी बात तो बना ली थी नई पार्टी

Sat, 28 Mar 2020 09:09 AM IST
शाहरुख खान केपी तिवारी, अमर उजाला, बाराबंकी
केपी तिवारी, अमर उजाला, बाराबंकी Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 28 Mar 2020 09:09 AM IST
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beni prasad verma death Beni Prasad Verma left chief minister chair for friendship
बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
राजनीति के कद्दावर नेता के रूप में कई दशक तक सक्रिय रहे बेनी प्रसाद वर्मा के निधन की खबर उनके जीवन के कई पहलुओं को लोगों के सामने ला दिया। प्रदेश और देश की राजनीति में मंत्री रह चुके बेनी वर्मा का सिरौली गौसपुर गांव में मोहनलाल वर्मा के घर जन्म हुआ था। राजनीति के सफर में वह बाबू जी के नाम से लोकप्रिय थे और यह लोकप्रियता उनके अक्खड़ स्वभाव और कड़क मिजाज के बावजूद बनी रही। 

 
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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
इसके पीछे जिले में कराए गए उनके काम रहे हों या फिर राजनीति में अपनी बात ही मनवाने का दृढ़ संकल्प उनके इस स्वाभाव के कायल दूसरे दलों के लोग भी थे। राजनीति के मंझे खिलाड़ी बेनी बाबू जहां यारों के यार थे वहीं जरा सी बात पर आर-पार करने के लिए मैदान में उतरने से भी नहीं हिचकते थे। उन्होंने स्वयं कई बार चर्चा के दौरान जिक्र किया कि मुलायम सिंह यादव और अजीत सिंह के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर छिड़ी जंग में उनका नाम लाया गया। 

 
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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
तो उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया कि वह मेरे मित्र हैं मैंने उनका नाम प्रस्तावित किया है और वही मुख्यमंत्री बनेंगे। पर दोनों में जब खटकी तो बेनी बाबू ने सपा छोड़कर राष्ट्रीय क्रांतिदल बना लिया। इसी तरह जिले में भी कई लोगों पर हाथ रखकर विधानसभा और लोकसभा भिजवाया और उन्हीं को पार्टी में रहते हुए हरा भी डाला। इतनी पकड़ रखने वाले बेनी वर्मा के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। उनके साथ काम करने वाले लोगों की माने तो बेनी बाबू भले ही कड़क रहे हों पर साथ देने में उनके जैसा नेता अब नहीं है। 
 
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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
चाहे राज्य सरकार में कारागार से लेकर लोक निर्माण, वित्त और संसदीय कार्यमंत्री का कार्यकाल रहा हो या फिर संचार और कोयला मंत्री के रूप में केंद्र सरकार में उनका दौर, उनकी कार्यशैली के सभी कायल थे। वह जिस विभाग के मंत्री बने उसका काम जिले में अभी भी दिखता है। यही नहीं अपनों को नौकरी देना हो या राजनीतिक अर्स पर पहुंचाना हो बेनी बाबू ने हाल ही में हुए जैदपुर के उपचुनाव तक अपनी भूमिका बखूबी अदा की। 
 
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बेनी प्रसाद वर्मा। - फोटो : amar ujala
राजनीति में कई उतार चढ़ाव के बीच सपा को ही माना अपना
बेनी प्रसाद वर्मा उपेक्षा से नाराज होकर अपनी पार्टी बनाई राष्ट्रीय क्रांति दल की पार्टी बनाई पूरे प्रदेश में चुनाव लड़ाया। पर पराजय के कारण राजनीति के अर्स से फर्श पर आ गए। उसके बाद कांग्रेस में जाकर सांसद ही नही केन्द्र में मंत्री बने पर बहुत दिन नही चली। लौटकर फिर सपा में आए मुलायम और बेनी की दोस्ती ऐसी रही कि कभी भी मुलायम सिंह ने उनके खिलाफ एक शब्द नही बोले। और वापस आने पर उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया। इस तरह बेनी बाबू भले ही अपने दल छोड़े हों पर उनका राजनीति का असली घर सपा ही रहा। 
 
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