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लखनऊ से खास था बापू का रिश्ता, यहां इस घर में होता था ठहरने व भोजन का इंतजाम, तस्वीरें
मोहम्मद इरफान, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 02 Oct 2018 12:18 PM IST
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इसी घर में ठहरते थे गांधी जी
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का लखनऊ से बहुत गहरा नाता रहा है। वो जब भी लखनऊ आते थे मौलाना अब्दुल बारी फिरंगी महली अपने घर में उनके ठहरने का खास इंतजाम करवाते थे। उनके लिए ब्राह्मण खानसामा शाकाहारी भोजन तैयार करता था। इतना ही नहीं महात्मा गांधी जब तक उनके घर में रहते थे उनका पूरा परिवार मांसाहारी भोजन से परहेज करता था।
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इसी घर में ठहरते थे गांंधी जी
- फोटो : अमर उजाला
महात्मा गांधी मौलाना अब्दुल बारी को ‘मेरे भाई’ कह कर संबोधित करते थे। मौलाना अब्दुल बारी के परनाती अदनान अब्दुल वाली बताते हैं कि महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा सलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी में खुद लिखा, ‘मैं मौलाना बारी के घर में मेहमान रहा, घर पुराने तरीके का बना हुआ है।
घर दिखाते फिरंगी महली
- फोटो : अमर उजाला
मौलाना ने विशेष तौर पर शाकाहारी भोजन के लिए ब्राह्मण खानसामा रखा। उन्होंने बताया कि जब तक गांधीजी फिरंगी महल में ठहरते थे पूरा परिवार मांसाहार से परहेज करता था।’ मौलाना अब्दुल बारी फिरंगी महली मौलाना अब्दुर्रज्जाक के पोते थे, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अलख जगाई और बारी ने उसे आगे बढ़ाया।
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गांधी के आगमन के पत्र दिखाते फिरंगी महली
- फोटो : अमर उजाला
महात्मा गांधी फिरंगी महल में कई बार आकर रुके। मौलाना अब्दुल बारी को 3 अगस्त 1921 को मौलाना मोहम्मद अली जौहर की ओर से भेजे गए तार को दिखाते हुए अदनान अब्दुल वाली ने बताया कि पत्र में मौलाना जौहर ने लिखा कि मैं पीलीभीत होते हुए गांधीजी को 7 अगस्त की दोपहर ला रहा हूं। दोशम्बे (सोमवार) को महात्मा पूरी तरह से वहां आराम करेंगे।
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घर दिखाते फिरंगी महल
- फोटो : अमर उजाला
लिखा, औरतों के लिए खासतौर पर परदे का इंतजाम होना चाहिए। उन्होंने बताया कि रिफाह-ए-आम क्लब मैदान में 15 अक्टूबर 1920 को जलसे में शामिल होने के लिए जब महात्मा गांधी लखनऊ आए तो वो मौलाना अब्दुल बारी फिरंगी महली से मिलने उनके आवास गए और वहां पर ठहरे। महात्मा गांधी ने जलसे में भाषण के दौरान इसका जिक्र भी किया।