परिवार के मुखिया व अपने पति की हत्या से क्षुब्ध महिला ग्राम प्रधान ने शस्त्र लाइसेंस व सुरक्षा के साथ तीन बीघा जमीन व विभिन्न मदों से मिलने वाली आर्थिक सहायता तत्काल दिलाने की मांग की है। ग्राम प्रधान ने कहा कि पति की हत्या से उनके परिवार का सहारा छिन गया है।
दलित प्रधान पति की हत्या के बाद गांव में दहशत का माहौल, पत्नी बोली- दिया जाए शस्त्र लाइसेंस
पूरे गांव में दहशत का माहौल
दलित महिला ग्राम प्रधान के पति की हत्या से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। घटना को लेकर दिन भर ग्रामीण सहमे रहे। ग्रामीणों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर ग्राम प्रधान के पति को क्यों मार डाला गया। घटना को लेकर गांव का कोई भी व्यक्ति खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं दिखा।
शोक संवदेना व्यक्त करने वालों का लगा तांता
ग्राम प्रधान के परिवार वालों को सांत्वना देने के लिए सुबह से लेकर रात तक लोगों का तांता लगा रहा। गांव के लोगों के अलावा ग्राम प्रधान के रिश्तेदार व इष्ट मित्र तथा बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग उनके घर पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त करने के साथ हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
छावनी में तब्दील हुआ गांव
महिला ग्राम प्रधान के पति की हत्या से गांव में खासा आक्रोश है। लोगों में सुलग रही आक्रोश की चिंगारी को देखते हुए प्रशासन ने पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया है। गांव में कई थानों की पुलिस व पीएसी लगाई गई है। सीओ गौरीगंज संतोष कुमार सिंह भी गांव में कैंप कर रहे हैं।
शव पहुंचा तो दिखा आंसुओं का सैलाब
महिला ग्राम प्रधान के पति का शव शाम चार बजे के बाद गांव पहुंचा। घर पर शव पहुंचा तो परिवारीजनों के अलावा लोगों की आंखों में आंसुओ का सैलाब दिखा। परिजन जहां फूट फूट कर रो रहे थे वहीं बाहर से पहुंचने वाले अपना आंसू पोंछने के साथ उन्हें सांत्वना देने में लगे रहे।
दो बच्चों की नहीं हुई शादी
प्रधानपति अर्जुन कोरी के परिवार में पत्नी छोटका के अलावा विवाहित पुत्र सुरेंद्र कोरी व पुत्री पुनीता व बैजयंती के अलावा अविवाहित पुत्र गोविंद व रवींद्र कुमार हैं। ग्राम प्रधान का कहना है कि उनके पति की मौत से अविवाहित दोनों बेटों के अलावा पूरे परविार की उम्मीदें चकनाचूर हो गईं।
बेहद मिलनसार थे अर्जुन
गांव वालों के अनुसार अर्जुन बेहद मिलनसार स्वभाव के थे। 2015 में उन्होंने अपनी पत्नी को ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ाया और विजय श्री हासिल की। लोगों ने बताया कि अर्जुन हर किसी के सुख दुख में शरीक होते थे। गांव के ऐसे लोगों की हर संभव सहायता करते थे जिसे आवश्यकता होती थी।
गांव में किसी के घर नहीं जला चूल्हा
ग्राम प्रधान के पति की मौत से गांव में मातम पसरा रहा शुक्रवार को गांव के अधिकांश घरों में चूल्हा तक नहीं जला। लोग सारा काम धाम छोड़कर अर्जुन के घर व पोस्टमॉर्टम हाउस पर डटे रहे। शाम को अर्जुन का शव गांव पहुंचा तो एक बार फिर पूरे गांव के लोग उनके घर के सामने पहुंच गए।