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दलित प्रधान पति की हत्या के बाद गांव में दहशत का माहौल, पत्नी बोली- दिया जाए शस्त्र लाइसेंस

Fri, 30 Oct 2020 07:21 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, भेटुआ (अमेठी)
संवाद न्यूज एजेंसी, भेटुआ (अमेठी) Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 30 Oct 2020 07:21 PM IST
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After assassination of Dalit head husband the atmosphere of panic in the village wife demand for arms license
दलित प्रधान पति की हत्या के बाद गांव में दहशत का माहौल - फोटो : amar ujala

परिवार के मुखिया व अपने पति की हत्या से क्षुब्ध महिला ग्राम प्रधान ने शस्त्र लाइसेंस व सुरक्षा के साथ तीन बीघा जमीन व विभिन्न मदों से मिलने वाली आर्थिक सहायता तत्काल दिलाने की मांग की है। ग्राम प्रधान ने कहा कि पति की हत्या से उनके परिवार का सहारा छिन गया है।



बंदोइया गांव में गुरुवार रात हुई महिला ग्राम प्रधान के पति की हत्या ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। शुक्रवार शाम ग्राम प्रधान के पति का शाम पोस्टमॉर्टम के बाद गांव पहुंचा तो परिवारीजनों के सब्र का बांध टूट गया। महिला ग्राम प्रधान छोटका का कहना था कि गांव के कुछ लोग उसके परिवार को गांव में कराए गए विकास कार्यों में धांधली का आरोप लगाकर लगातार परेशान कर रहे थे। मन नहीं भरा तो शिकायतकर्ताओं ने उसके पति को जलाकर मार डाला। महिला ग्राम प्रधान ने कहा कि उसका पति ही परिवार का मुखिया और सहारा थ। पति की मौत से पूरा परिवार टूट गया है। 

ग्राम प्रधान ने प्रशासन से परिवार को शस्त्र लाइसेंस व सुरक्षा, किसान दुर्घटना बीमा का पांच लाख रुपये, एससीएसटी एक्ट में मिलने वाली 8.12 लाख रुपये की अनुग्रह राशि, जीवन यापन के लिए तीन बीघा जमीन का आवंटन दिलाने के साथ घटना में नामजद आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कराने की मांग की। महिला ग्राम प्रधान का कहना था कि दबंगों ने उसके परिवार का चैन सुकून छीनने के बाद जीने का सहारा भी छीन लिया।
 

After assassination of Dalit head husband the atmosphere of panic in the village wife demand for arms license
दलित प्रधान पति की हत्या के बाद गांव में दहशत का माहौल - फोटो : amar ujala

पूरे गांव में दहशत का माहौल 
दलित महिला ग्राम प्रधान के पति की हत्या से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। घटना को लेकर दिन भर ग्रामीण सहमे रहे। ग्रामीणों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर ग्राम प्रधान के पति को क्यों मार डाला गया। घटना को लेकर गांव का कोई भी व्यक्ति खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं दिखा। 

After assassination of Dalit head husband the atmosphere of panic in the village wife demand for arms license
दलित प्रधान पति की हत्या के बाद गांव में दहशत का माहौल - फोटो : amar ujala

शोक संवदेना व्यक्त करने वालों का लगा तांता
ग्राम प्रधान के परिवार वालों को सांत्वना देने के लिए सुबह से लेकर रात तक लोगों का तांता लगा रहा। गांव के लोगों के अलावा ग्राम प्रधान के रिश्तेदार व इष्ट मित्र तथा बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग उनके घर पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त करने के साथ हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

छावनी में तब्दील हुआ गांव
महिला ग्राम प्रधान के पति की हत्या से गांव में खासा आक्रोश है। लोगों में सुलग रही आक्रोश की चिंगारी को देखते हुए प्रशासन ने पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया है। गांव में कई थानों की पुलिस व पीएसी लगाई गई है। सीओ गौरीगंज संतोष कुमार सिंह भी गांव में कैंप कर रहे हैं। 

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दलित प्रधान पति की हत्या के बाद गांव में दहशत का माहौल - फोटो : amar ujala

शव पहुंचा तो दिखा आंसुओं का सैलाब
महिला ग्राम प्रधान के पति का शव शाम चार बजे के बाद गांव पहुंचा। घर पर शव पहुंचा तो परिवारीजनों के अलावा लोगों की आंखों में आंसुओ का सैलाब दिखा। परिजन जहां फूट फूट कर रो रहे थे वहीं बाहर से पहुंचने वाले अपना आंसू पोंछने के साथ उन्हें सांत्वना देने में लगे रहे। 

दो बच्चों की नहीं हुई शादी
प्रधानपति अर्जुन कोरी के परिवार में पत्नी छोटका के अलावा विवाहित पुत्र सुरेंद्र कोरी व पुत्री पुनीता व बैजयंती के अलावा अविवाहित पुत्र गोविंद व रवींद्र कुमार हैं। ग्राम प्रधान का कहना है कि उनके पति की मौत से अविवाहित दोनों बेटों के अलावा पूरे परविार की उम्मीदें चकनाचूर हो गईं।

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दलित प्रधान पति की हत्या के बाद गांव में दहशत का माहौल - फोटो : amar ujala

बेहद मिलनसार थे अर्जुन
गांव वालों के अनुसार अर्जुन बेहद मिलनसार स्वभाव के थे। 2015 में उन्होंने अपनी पत्नी को ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ाया और विजय श्री हासिल की। लोगों ने बताया कि अर्जुन हर किसी के सुख दुख में शरीक होते थे। गांव के ऐसे लोगों की हर संभव सहायता करते थे जिसे आवश्यकता होती थी।

गांव में किसी के घर नहीं जला चूल्हा
ग्राम प्रधान के पति की मौत से गांव में मातम पसरा रहा शुक्रवार को गांव के अधिकांश घरों में चूल्हा तक नहीं जला। लोग सारा काम धाम छोड़कर अर्जुन के घर व पोस्टमॉर्टम हाउस पर डटे रहे। शाम को अर्जुन का शव गांव पहुंचा तो एक बार फिर पूरे गांव के लोग उनके घर के सामने पहुंच गए।

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