‘साल 2008 में पहली बार वारदात हुई...। उसके बाद से कम से कम सात बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। घर आने-जाने के लिए रास्ते के विवाद में ठाकुर बिरादरी के लोग जान के दुश्मन बने हुए हैं। हर बार घटना होती है तो पुलिस प्रशासन के पास सुरक्षा और मदद की फरियाद करता रहा, पर किसी ने नहीं सुना। अब हिम्मत हार चुके हैं...। दो बच्चों का चेहरा देखकर घुट-घुट कर जी रहे थे। पासी बिरादरी के हैं... डीएम-एसपी सबके यहां गया, पर कुछ नहीं हुआ। पत्नी होली पर ऊंचाहार आई थी। बृहस्पतिवार को लखनऊ के लिए सुबह नौ बजे निकली। करीब साढ़े नौ बजे ट्रेन में बैठा दिया और घर चला आया। (पीड़िता से मिलने के लिए यूपी की कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी गईं। सीएम आदित्यनाथ ने भी उससे मुलाकात की।)
शाम करीब चार बजे पुलिस का फोन आया कि तुम्हारी पत्नी के साथ इस तरह की घटना हो गई है। भागा-भागा शाम करीब छह बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। पत्नी से पूछा- क्या हुआ तो वो कुछ बता न सकी। इशारे से मुंह के नीचे का हिस्सा दिखाया तो पूरा माजरा समझ में आ गया। ढांढस बंधाया तो उसने आपबीती सुनाई।’ ये शब्द हैं उस महिला के पति के जिसकी पत्नी को जबरन बृहस्पतिवार को गंगा-गोमती एक्स्प्रेस में तेजाब पिला दिया गया।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने शुक्रवार को ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर पीड़िता का हालचाल लिया। डॉक्टरों को हिदायतें दीं। मदद का एलान किया। इस सबको लेकर सवाल पर वह बोल पड़ता है- सीएम के आने से नौ साल बाद न्याय की उम्मीद जगी है। उम्मीद है अब न्याय मिल जाएगा। सब कुछ दुरुस्त हो जाएगा। पर दूसरे ही लफ्ज में फिर उसकी पीड़ा छलक पड़ती है.... गुड्डू सिंह, भोंदू सिंह, ननकऊ और त्रिभुवन सिंह घर के सामने स्थित रास्ते को लेकर जान का दुश्मन बने हुए हैं।
धमकी देते हैं कि यहां से छोड़कर कहीं और चले जाओ नहीं जान से मार देंगे। पति पत्नी के साथ बच्चों की जान भी मुश्किल में पड़ जाएगी। 2008 से अब तक सात बार हमले और जान से मारने की कोशिश हो चुकी है। 2012 में जानेलवा हमला हुआ तो दो लोग जेल गए लेकिन कुछ दिन बाहर बाहर आ गए। इस दौरान कुछ दिन तक सुरक्षा भी मिली लेकिन कुछ दिन बाद हटा ली गई।
इसके बाद फिर से इन सबने लड़ाई झगड़ा किया और सबके सामने बेरहमी से पीटा। पुलिस से शिकायत की तो दरोगा ने कह दिया कि जानते हो कि लड़ नहीं सकते तो क्यों नहीं कहीं और चले जाते। आखिर हम कहां चले जाएं, जब रहने और खाने का सही ठिकाना ही नहीं है।