वर्ष 2019 में लखनऊ के नाम दो बड़ी उपलब्धियां रहीं। साल की शुरुआत में मेट्रो जहां पूरे 23 किमी रूट यानी एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया के बीच रफ्तार भरने लगी वहीं साल के अंत में शहर की सीमा को दोगुना बढ़ाते हुए 88 नए गांव नगर निगम में शामिल कर लिए गए। इससे नए इलाकों में विकास का रास्ता खुला। स्मार्ट सिटी में शहर को नई सौगातें मिलनी शुरू हुईं तो बिजली संकट दूर करने को नए उपकेंद्र चालू हुए। उधर, राजधानी में बाहरी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए बन रहे आउटर रिंगरोड के पहले चरण का काम पूरा होने से वाहन फर्राटा भरने लगे। इससे दिखा कि भविष्य का लखनऊ कैसा होगा?
लखनऊ के लिए उपलब्धियों का साल रहा 2019, सौगातों ने बदल दी शहर की तस्वीर
50,000 लोग रोजाना कर रहे मेट्रो की सवारी
नौ मार्च 2019 को कानपुर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया तक मेट्रो के कॉमर्शियल रन की शुरुआत की। अब करीब 50 हजार यात्री प्रतिदिन रेडलाइन पर 21 मेट्रो स्टेशनों के बीच यात्रा कर रहे हैं। इससे इंदिरानगर, गोमतीनगर, हजरतगंज जैसे इलाकों से चारबाग और एयरपोर्ट जाना आसान हो गया। एलयू तक छात्रों को भी पहुंचने में सुविधा मेट्रो दे रही है।
राजधानी से चली पहली कॉरपोरेट ट्रेन तेजस
उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे ने इस वर्ष तरक्की की कई इबारतें लिखीं। इसमें सबसे बड़ी उपलब्धि देश की पहली कारपोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस है, जो अक्तूबर में लखनऊ जंक्शन से आनंदविहार के बीच शुरू हुई है।
ऐसे ही ऐशबाग से सीतापुर के बीच छोटी लाइन की जगह ब्रॉडगेज का काम पूरा हुआ और ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। चारबाग पर सुविधाओं और सुरक्षा में बढ़ोतरी कर नया फुटओवर ब्रिज, लगेज स्कैनर, सब-वे की मरम्मत, फसाड लाइटिंग जैसे काम पूरे हुए। प्लेटफॉर्म नंबर छह और सात की मरम्मत भी हुई। चंडीगढ़ एक्सप्रेस, गोमती एक्सप्रेस में जहां एलएचबी बोगी लगीं। वहीं लखनऊ मेल, काशी विश्वनाथ, एसी एक्सप्रेस व जीआरपी को आईएसओ सर्टिफिकेट मिला।
गोमती सफाई को तेज हुआ एसटीपी का काम
कचरा प्रबंधन योजना 2019 में भी सुधर नहीं पाई। खुले कूड़ा घरों को बंद कर कॉम्पैक्टर लगाने का काम तो हुआ, लेकिन उनके संचालन का काम सही से न होने से वहां पर भी कूड़ा खुले में दिखता रहा। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन भी शत प्रतिशत नहीं हो रहा है। कूड़ा प्रबंधन की तरह ही अतिक्रमण भी नासूर बना रहा। फेरी नीति पर काम हुआ, लेकिन इसे प्रभावी नहीं बनाया जा सका। कागजी कार्रवाई के लिए करीब 30 दुकानदारों को प्रमाण पत्र जारी हुए, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं दिखा।
गोमती में गिर रहे नालों के गंदे पानी और सीवर को रोकने के लिए लोहिया पथ के किनारे हैदर कैनाल पर 120 एमएलडी क्षमता एसटीपी बनाने का काम इस साल शुरू हुआ। इसके अलावा हैदर कैनाल पर रेटिंग वाल बनाने कालीदास मार्ग चौक से डीजीपी मोड़ तक सड़क बनाने का काम भी अब तक शुरू नहीं हुआ।
कचरा प्रबंधन रहा लाइलाज
568 वर्ग किमी हुई नगर सीमा
कई साल से अटके नगर निगम सीमा विस्तार के प्रस्ताव को इस साल मंजूरी मिल गई। शासन से गजट नोटिफिकेशन भी हो गया। उसके बाद अब शहर के नए 88 गांव विधिवत रूप से नगर निगम सीमा में शामिल हो गए हैं। जिससे अब दो नगर निगम (ट्रांस गोमती और सिस गोमती) बनाए जाने की जरूरत भी महसूस की जा रही है। नए वार्ड ओर जोन भी बनाए जाएंगे नगर निगम की सीमा 258 वर्ग किमी से बढ़कर 568 वर्ग किमी हो गई है।
आउटर रिंगरोड पर वाहनों ने भरा फर्राटा
आउटर रिंगरोड प्रोजेक्ट के एक भाग अयोध्या हाइवे से कुर्सी रोड के बीच निर्माण पूरा कर लिया गया। यहां 14 किमी लंबे सेक्शन में वाहनों ने आवाजाही भी शुरू कर दी है। इससे कुर्सी रोड होते हुए सीतापुर हाइवे के वाहन अब सीधे शहर के बाहर अयोध्या हाइवे पर पहुंच जा रहे हैं। वहीं बाकी सेक्शन के निर्माण को शुरू कर दिया गया है।