लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। इनमें सैयद जावीद अहमद की अलग पहचान है।
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पूर्व डीजीपी सैयद जावीद अहमद
- फोटो : डेमो
दो साल पहले यूपी के पुलिस महानिदेशक बने 1984 बैच के आईपीएस सैयद जावीद अहमद को ईमानदारी के साथ जांबाजी के लिए याद किया जाता है। प्रदेश पुलिस की कमान संभालने के साथ जावीद अहमद ने अपराध नियंत्रण के साथ कानून व्यवस्था व पुलिसकर्मियों की समस्याओं के समाधान का काम शुरू किया।
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पूर्व डीजीपी सैयद जावीद अहमद
- फोटो : amar ujala
सीबीआई के संयुक्त निदेशक केे पद पर तैनाती के दौरान एनएचआरएम घोटाले की जांच कर चुके जावीद अहमद की ईमानदारी के चलते राजनेता उन पर दबाव बनाने में हिचकते थे। उन्होंने सभी कप्तानों को थानों पर नागरिकों की सीधी सुनवाई के आदेश दिए। प्राथमिकी दर्ज करने में टालमटोल पर अंकुश लगाने के साथ कानून व्यवस्था के क्षेत्र में ठोक काम शुरू किए। धरना-प्रदर्शन में बल प्रयोग की स्थिति की गहन समीक्षा के साथ ट्रेजर गन के इस्तेमाल की रूपरेखा तैयार की।
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पूर्व डीजीपी सैयद जावीद अहमद
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इस गन की क्षमता नापने के लिए उन्होंने खुद पर प्रयोग कराया। पुलिस महानिदेशक कक्ष में दो अधिकारियों ने उन्हें पकड़ा और पुलिसकर्मी ने पीठ पर निशाना बनाकर फायर किया। गोली लगने से कुछ समय के लिए शरीर सुन्न पड़ा और वह फर्श पर गिर गए। खुद पर गोली चलवाने के प्रयोग की दो साल बाद भी पुलिस महानिदेशक कार्यालय में चर्चा होती रहती है।
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पूर्व डीजीपी सैयद जावीद अहमद
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सिपाहियों से हाथ मिलाकर छोड़ी कुर्सी
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद वरिष्ठ आईपीएस सुलखान सिंह की पुलिस महानिदेशक के पद पर तैनाती के साथ जावीद अहमद को पीएसी की कमान सौंपी गई। उन्होंने सिपाहियों से हाथ मिलाकर विदाई ली और साथ काम करने वाले सभी अधिकारियों की सराहना की।