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शारीरिक-मानसिक और आर्थिक बाधाओं को पार कर इन होनहारों ने पाई सफलता, तस्वीरें

Sat, 11 Jul 2020 05:39 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 11 Jul 2020 05:39 PM IST
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achievement of students inspite of problems in personal life
मो. अर्शद, अभिनव बाजपेयी - फोटो : amar ujala
मन में लगन और इरादा पक्का हो तो कठिनाइयां भी हमारा रास्ता नहीं रोक सकती। सीआईसीएसई के 10वीं और 12वीं के रिजल्ट में मेधावियों ने इस बात को पूरी तरह से सच साबित करके दिखाया है। बोर्ड परीक्षा के दौरान किसी ने अपनी मां को खोया तो किसी की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। जबकि दृष्टिबाधित छात्रा ने अच्छे अंकों के साथ परीक्षा पास की। पेश है ऐसे ही जीवट मेधावियों पर एक रिपोर्ट- 



 
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achievement of students inspite of problems in personal life
अमर ज्योति पाल - फोटो : amar ujala
दृष्टिबाधित अमर ज्योति ने हासिल की सफलता
लखनऊ पब्लिक स्कूल एंड कॉलेजेस के अमर ज्योति पाल ने 10वीं में 84 फीसदी अंक हासिल करके सामान्य बच्चों के सामने भी मिसाल पेश की है। घर पर वह अपनी बहन दिव्य ज्योति के साथ पढ़ाई करते। अमर ज्योति की मां सरिता पाल ने बताया कि बेटा दृष्टिबाधित था तो उसे विशेष स्कूल में पढ़ाने का प्रयास किया गया। मगर एलपीएस ने उनको सहयोग किया।


 
achievement of students inspite of problems in personal life
मो. अर्शद - फोटो : amar ujala
90.6 फीसदी नंबर लाने के बाद खतरे में पढ़ाई
पाटानाला निवासी मो. अर्शद ने 10वीं में बिना किसी ट्यूशन या कोचिंग के 90.6 फीसदी अंक हासिल किए हैं। अर्शद के पिता असलम जरी कारीगर हैं। पिछले कई महीने से उनका काम भी बंद है। ऐसे में परिवार की चिंता है कि उसकी आगे की पढ़ाई कैसे होगी। अर्शद कहते हैं वह अपने पिता के संघर्ष को देखकर और मेहनत करते हैं।

 
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तरुण - फोटो : amar ujala
निजी नौकरी के सहारे परिवार, बेटे के 94%अंक
राजाबाजार निवासी सुजीत कुमार के बेटे तरुण ने दसवीं में 94 फीसदी नंबर हासिल किए। इसी खुशी में उनके स्कूल ब्रेन कॉन्वेंट का भी पूरा योगदान रहा। क्योेंकि विद्यालय प्रबंधक अनीस अहमद ने पूरे दो साल कोई फीस नहीं ली। तरुण ने बताया कि उसका मकसद आगे चलकर सीए बनना है। घर की आर्थिक स्थिति सुधारना है।

 
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अभिनव बाजपेयी - फोटो : amar ujala
बोर्ड परीक्षा के दौरान हुई मां की मौत, नहीं हारी हिम्मत
बंथरा निवासी अभिनव बाजपेयी के लिए यह बोर्ड परीक्षा किसी पहाड़ से कम नहीं थी। परीक्षा के दौरान ही उसकी मां अरुणा वाजपेयी की मौत प्रेशर कुकर ब्लास्ट होने की वजह से हो गई थी। इसके बावजूद अभिनव ने हिम्मत नहीं हारी और परीक्षा की तैयारी करता रहा। अभिनव ने 12वीं में 88.8 फीसदी अंक हासिल किए। 
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