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70 फीसदी गाइनोकॉलोजिस्ट करना ही नहीं चाहतीं ब्रेस्ट कैंसर का इलाज, शोध में हुए चौंकाने वाले खुलासे

Sat, 08 Sep 2018 11:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 08 Sep 2018 11:46 AM IST
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70 percent gynaecologist do not want to treat breast cancer patient
breast cancer
ब्रेस्ट कैंसर के मामले में 70 फीसदी गाइनोकॉलोाजिस्ट इलाज करने से कतराती हैं। वे इस तरह के मरीजों को रेफर करने में विश्वास रखती हैं। ऐसे में धीरे-धीरे मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। ब्रेस्ट कैंसर की पहचान होते ही इलाज शुरू कर दिया जाए तो यह जीवन के लिए खतरा नहीं बनेगा। 
70 percent gynaecologist do not want to treat breast cancer patient
डॉ. गीतिका नंदा - फोटो : amar ujala
यह खुलासा हुआ है केजीएमयू की सर्जरी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर गीतिका नंदा सिंह के रिसर्च में। उन्होंने लखनऊ के साथ ही कानपुर, इलाहाबाद, बरेली सहित विभिन्न शहरों में कार्यरत निजी एवं सरकारी गाइनोकॉलोजिस्ट से बातचीत कर उनकी कार्यप्रणाली पर शोध किया है।
70 percent gynaecologist do not want to treat breast cancer patient
doctor - फोटो : amar ujala
खास बात यह है कि पुरुष गाइनोकॉलोजिस्ट तो पूरी तरह से इस तरह के केस रेफर कर देते हैं। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि पुरुष गाइनोकॉलोजिस्ट से महिलाएं ब्रेस्ट संबंधी बीमारियों के बारे में बात नहीं करती हैं। इससे उनका मर्ज बढ़ता जाता है और फिर स्थिति बेहद खराब हो जाती है। उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर की जानकारियों को लेकर गाइनोकॉलोजिस्ट की जागरूकता और जानकारी को भी परखा। 
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70 percent gynaecologist do not want to treat breast cancer patient
सांकेतिक तस्वीर
152 सवालों का लिया जवाब
डॉ. गीतिका नंदा ने बताया कि विभिन्न शहरों के करीब 184 गाइनोकॉलोजिस्ट से बातचीत की। इसके लिए 152 सवाल तैयार किए गए। रिसर्च के दौरान पता चला कि करीब 82 फीसदी गाइनोकॉलोजिस्ट बीमारियों के बारे में वाकिफ हैं। वे नई तकनीक से भी वाकिफ हैं, लेकिन इलाज से परहेज करते हैं। महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर खुद कैसे पहचानें और कौन सी जांच कराएं ये भी नहीं बताती हैं। इस रिसर्च में उन्हीं गाइनोकॉलोजिस्ट को शामिल किया, जो करीब पांच से 15 साल से मरीजों का इलाज करने का अनुभव रखते हैं। 
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consult doctor
जानकारी को रखा अलग-अलग कैटेगरी में
रिसर्च में पाया गया कि ब्रेस्ट कैंसर को लेकर करीब 26.3 फीसदी गाइनाकॉलोजिस्ट अति उत्तम जानकारी रखते हैं। 58.6 फीसदी बहुत अच्छा, 8.6 फीसदी अच्छा और 9.2 कमजोर जानकारी रखते हैं। इनमें 84 फीसदी खुद स्वीकार करते हैं कि समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से ब्रेस्ट कैंसर के मामले गंभीर हो जाते हैं, जबकि, 61.2 फीसदी ने कहा कि ब्रेस्ट संबंधी दिक्कत होने पर तत्काल विशेषज्ञ को दिखाया जाना चाहिए। मेमोग्राफी जांच कराने के बाद सिर्फ 25 फीसदी ही सलाह देते हैं। डॉ. गीतिका से साथ इस रिसर्च में डॉ. आशा अग्रवाल, डॉ. विनोद जैन, डॉ. प्रीति कुमार शामिल हैं। 
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