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Lucknow News: हिंदी के विस्तार और चुनौतियों पर मंथन
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लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में बुधवार को राजभाषा हिंदी उत्सव के तहत एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों ने हिंदी के विस्तार और संवर्धन पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक और अकादमिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना था।
विभागाध्यक्षों ने उच्च शिक्षा में हिंदी के बढ़ते महत्व और व्यावहारिक उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, विधि और तकनीकी जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी हिंदी को अध्ययन-अध्यापन का माध्यम बनाने की बात कही। इसके लिए विषयवार हिंदी संदर्भ सामग्री, पाठ्य पुस्तकों और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने पर बल दिया गया। कार्यक्रम में हिंदी के समक्ष चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने हिंदी लेखकों और शोधार्थियों को प्रोत्साहन देने की संभावनाओं पर भी विचार किया। कहा गया कि हिंदी का विकास अन्य भाषाओं के विरोध में नहीं, बल्कि समन्वय और बहुभाषिकता के साथ होना चाहिए। कार्यक्रम में सुदर्शन वर्मा, वेंकटेश दत्ता, एम.एल. मीणा, शरद सोनकर और प्रीति राय उपस्थित रहे। सहायक कुलसचिव रामकुमार गुप्ता और संध्या दीक्षित भी मौजूद रहे। संवाद का लक्ष्य पाठ्यक्रमों में हिंदी की भूमिका बढ़ाना था। साथ ही, हिंदी भाषा और साहित्य की चुनौतियों व संभावनाओं पर विचार करना भी इसका हिस्सा था। (माई सिटी रिपोर्टर)
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विभागाध्यक्षों ने उच्च शिक्षा में हिंदी के बढ़ते महत्व और व्यावहारिक उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, विधि और तकनीकी जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी हिंदी को अध्ययन-अध्यापन का माध्यम बनाने की बात कही। इसके लिए विषयवार हिंदी संदर्भ सामग्री, पाठ्य पुस्तकों और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने पर बल दिया गया। कार्यक्रम में हिंदी के समक्ष चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने हिंदी लेखकों और शोधार्थियों को प्रोत्साहन देने की संभावनाओं पर भी विचार किया। कहा गया कि हिंदी का विकास अन्य भाषाओं के विरोध में नहीं, बल्कि समन्वय और बहुभाषिकता के साथ होना चाहिए। कार्यक्रम में सुदर्शन वर्मा, वेंकटेश दत्ता, एम.एल. मीणा, शरद सोनकर और प्रीति राय उपस्थित रहे। सहायक कुलसचिव रामकुमार गुप्ता और संध्या दीक्षित भी मौजूद रहे। संवाद का लक्ष्य पाठ्यक्रमों में हिंदी की भूमिका बढ़ाना था। साथ ही, हिंदी भाषा और साहित्य की चुनौतियों व संभावनाओं पर विचार करना भी इसका हिस्सा था। (माई सिटी रिपोर्टर)
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