फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

एक झटके में उजड़ गई 18 साल की गृहस्थी, वापस लौटे मजदूरों ने बयां किया दर्द

Tue, 12 May 2020 06:53 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 12 May 2020 06:53 PM IST
विज्ञापन
6300 workers reached lucknow by shramik special trains
- फोटो : amar ujala
पांच श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से 6300 प्रवासी लखनऊ लाए गए हैं। तीन यात्रियों का तापमान थर्मल स्क्रीनिंग में ज्यादा मिलने पर उन्हें बीबीडी में बने क्वारंटीन सेंटर भेजा गया। बाकी को बसों से गृह जनपद रवाना कर दिया गया। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम संजय त्रिपाठी ने बताया कि चारबाग सहित मंडल के 12 स्टेशनों पर अब 26 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें आ चुकी हैं। इनसे करीब 30 हजार कामगार राजधानी पहुंच चुके हैं। 

 
6300 workers reached lucknow by shramik special trains
- फोटो : amar ujala

उन्होंने कहा कि देश में लॉकडाउन की वजह से हजारों मजदूर महाराष्ट्र, गुजरात, केरल व कर्नाटक में फंसे हैं। उन्हें वापस लाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। सोमवार को 6300 यात्री चारबाग रेलवे स्टेशन पर आए।

स्टेशन पहुंचे लोगों ने बयां किया अपना दर्द

6300 workers reached lucknow by shramik special trains
ज्योति यादव। - फोटो : amar ujala

पति की 18 साल पहले सूरत में नौकरी लगी। कुल 4200 रुपये तनख्वाह मिलती थी। कुछ पैसा घर भेजते थे और कुछ से खर्च चलाते थे। वहां एक कमरा किराए पर ले रखा था और एक दिन मुझे भी बच्चों सहित बुला लिया। मैं भी उनके साथ फैक्टरी में काम करने लगी। बच्चों की पढ़ाई के लिए कुछ पूंजी भी जमा कर ली थी लेकिन कोरोना के चलते लॉकडाउन ने एक झटके में गृहस्थी उजाड़ दी। अब नए सिरे से संघर्ष करना है। जिंदगी की यह जद्दोजहद ज्योति यादव की है, जो गोरखपुर की हैं और सोमवार को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंचीं। उन्होंने अपने दर्द को कुछ इन्हीं शब्दों में बयां किया। ज्योति की तरह विभिन्न ट्रेनों से लखनऊ पहुंचे लोगों ने अपना दर्द अमर उजाला से साझा किया।

विज्ञापन
विज्ञापन
6300 workers reached lucknow by shramik special trains
मीर आलम। - फोटो : amar ujala
सूरत से लखनऊ पहुंचे मीर आलम ने बताया कि गोरखपुर में खेती बाड़ी थी, जो रिश्तेदारों ने हड़प ली। इसके बाद सूरत चले गए और एक निजी कंपनी में काम करने लगे। जिंदगी पटरी पर लौटी ही थी कि लॉकडाउन ने सब बिखेर दिया। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि श्रमिकों के लिए रोजगार की व्यवस्था की जाए।
विज्ञापन
6300 workers reached lucknow by shramik special trains
महमूद आलम। - फोटो : amar ujala

महमूद आलम ने बताया कि सूरत में बनाई गृहस्थी मजबूरी में पड़ोसियों को देकर लौटे हैं। अब गांव में गुजारे को लेकर चिंता है। घनश्याम ने बताया कि गोरखपुर में चार बीघा खेत था, जिसे बेचकर नौकरी के लिए सूरत चले गए। वहां सब कुछ अच्छा चल रहा था। अब जब लौटना पड़ रहा है तो रोजी रोटी का संकट है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed