पांच श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से 6300 प्रवासी लखनऊ लाए गए हैं। तीन यात्रियों का तापमान थर्मल स्क्रीनिंग में ज्यादा मिलने पर उन्हें बीबीडी में बने क्वारंटीन सेंटर भेजा गया। बाकी को बसों से गृह जनपद रवाना कर दिया गया। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम संजय त्रिपाठी ने बताया कि चारबाग सहित मंडल के 12 स्टेशनों पर अब 26 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें आ चुकी हैं। इनसे करीब 30 हजार कामगार राजधानी पहुंच चुके हैं।
उन्होंने कहा कि देश में लॉकडाउन की वजह से हजारों मजदूर महाराष्ट्र, गुजरात, केरल व कर्नाटक में फंसे हैं। उन्हें वापस लाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। सोमवार को 6300 यात्री चारबाग रेलवे स्टेशन पर आए।
स्टेशन पहुंचे लोगों ने बयां किया अपना दर्द
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ज्योति यादव।
- फोटो : amar ujala
पति की 18 साल पहले सूरत में नौकरी लगी। कुल 4200 रुपये तनख्वाह मिलती थी। कुछ पैसा घर भेजते थे और कुछ से खर्च चलाते थे। वहां एक कमरा किराए पर ले रखा था और एक दिन मुझे भी बच्चों सहित बुला लिया। मैं भी उनके साथ फैक्टरी में काम करने लगी। बच्चों की पढ़ाई के लिए कुछ पूंजी भी जमा कर ली थी लेकिन कोरोना के चलते लॉकडाउन ने एक झटके में गृहस्थी उजाड़ दी। अब नए सिरे से संघर्ष करना है। जिंदगी की यह जद्दोजहद ज्योति यादव की है, जो गोरखपुर की हैं और सोमवार को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंचीं। उन्होंने अपने दर्द को कुछ इन्हीं शब्दों में बयां किया। ज्योति की तरह विभिन्न ट्रेनों से लखनऊ पहुंचे लोगों ने अपना दर्द अमर उजाला से साझा किया।
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मीर आलम।
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सूरत से लखनऊ पहुंचे मीर आलम ने बताया कि गोरखपुर में खेती बाड़ी थी, जो रिश्तेदारों ने हड़प ली। इसके बाद सूरत चले गए और एक निजी कंपनी में काम करने लगे। जिंदगी पटरी पर लौटी ही थी कि लॉकडाउन ने सब बिखेर दिया। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि श्रमिकों के लिए रोजगार की व्यवस्था की जाए।
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महमूद आलम।
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महमूद आलम ने बताया कि सूरत में बनाई गृहस्थी मजबूरी में पड़ोसियों को देकर लौटे हैं। अब गांव में गुजारे को लेकर चिंता है। घनश्याम ने बताया कि गोरखपुर में चार बीघा खेत था, जिसे बेचकर नौकरी के लिए सूरत चले गए। वहां सब कुछ अच्छा चल रहा था। अब जब लौटना पड़ रहा है तो रोजी रोटी का संकट है।