भारत के सबसे पुराने पांच रेस्त्रां जहां का स्वाद है बेमिसाल, खाने के शौकीनों का जाना तो बनता है
गलौटी कबाब, बिरयानी और कोरमा के लिए मशहूर टुंडे कबाबी जाकर खाना चखना तो बनता है। यहां के कबाब मुंह में जाते ही गल जाते हैं। हालांकि इसके पीछे एक खानदानी राज है क्योंकि इसके लिए घर की महिलाएं खास मसाला तैयार करती हैं। कहा जाता है कि टुंडे कबाबी की शुरुआत 1905 में लखनऊ में हाजी मुराद अली ने की थी, जिनके सिर्फ एक हाथ थे।
कोलकाता की पार्क स्ट्रीट में मौजूद यह मशहूर बेकरी, 1927 में शुरू हुई थी। इसकी शुरुआत स्विट्ज़रलैंड के एक दंपत्ति, मिस्टर एंड मिसेज जे फ्लरी ने की थी, जिन्होंने कोलकाता को अपना घर बना लिया था। आज यह कोलकाता की मशहूर कॉफी शॉप है। यहां की रम बॉल्स, क्रीम मिरेंग और इंग्लिश ब्रेकफास्ट काफी मशहूर हैं । इसके अलावा आमलेट, क्रीम ऑफ मशरूम ऑन टोस्ट, डोनट्स और हॉट चॉकलेट भी लोगों के पसंदीदा स्नैक्स हैं। कहा जाता है कि प्रसिद्ध फिल्मकार सत्यजीत रे हर रविवार नाश्ते के लिए इस जगह पर आते थे। इस समय कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद में फ्लरी बेकरी के 15 आउटलेट हैं।
1871 में स्थापित, यह कैफे मुंबई के सबसे पुराने रेस्त्रां में से एक है और लोग इसके दीवाने हैं। मेन्यू में चाइनीज से लेकर इटैलियन और भारतीय सब कुछ है। लियोपोल्ड स्पेशल वेजीटेरियन पास्ता, रेड पेपर चिकन, प्रॉन चिली और सोया वाइन चिकन यहां के मशहूर पकवान हैं। 2003 के उपन्यास, शांताराम, में भी इसका जिक्र है। ओलंपिया कॉफी हाउस के सामने, शहीद भगत सिंह रोड, कोलाबा कॉजवे, मुंबई पहुंचकर स्वाद चख सकते हैं।
नेहरू रोड, चौक बाजार दार्जिलिंग पर स्थित यह रेस्त्रां 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। ये लोकल और टूरिस्ट की पसंदीजी जगह मानी जाती है। इस बेकरी के डिजर्ट का तो कोई जवाब ही नहीं है जिसमें मजेदार एप्पल पाई, स्टिकी सिनेमन बन्स और फ्रेश मीट पाई बहुत पसंद की जाती हैं। इनकी दार्जिलिंग चाय तो लोगों में काफी मशहूर है।