Famous Devi Temples in Bihar : देशभर में कई प्राचीन और प्रसिद्ध देवी माता मंदिर है, जहां देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। कहीं देवी माता गौरी के रूप में पूजनीय हैं तो कहीं माता महालक्ष्मी की उपासना होती है। इसके अलावा देश-विदेश तक देवी के शक्तिपीठ भी विद्यमान हैं। उत्तर से दक्षिण तक दिव्य और सिद्ध देवी मंदिरों के बीच आपके राज्य और शहर में भी कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जो देवी मां को समर्पित हैं। अगर आप बिहार के रहने वाले हैं तो यहां देवी मां की विशेष कृपा है, क्योंकि इस राज्य में शक्तिपीठ होने के साथ ही कई प्राचीन मंदिर हैं, जिनका इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा है।
Temples in Bihar: ये हैं बिहार के प्रसिद्ध देवी मंदिर, नवरात्रि में करें दर्शन और पूजन
नवरात्रि के दौरान इन देवी माता मंदिरों में दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। आइए जानते हैं बिहार के प्रसिद्ध देवी मंदिरों के बारे में।
पटनेश्वर देवी मंदिर
बिहार की राजधानी पटना में पटनेश्वर देवी मंदिर स्थित है। यह मंदिर देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां माता सती की दाहिनी जांघ गिरी थी। यहां माता की पूजा पटनेश्वरी देवी के रूप में की जाती है। नवरात्रि के समय इस मंदिर में खास पूजा अर्चना होती है और बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। कहते हैं कि यह मंदिर शहर की रक्षा करता है, इसलिए मंदिर को रक्षिका भगवती पटनेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है।
मनसा देवी मंदिर
बिहार के भागलपुर जिले में मनसा देवी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। यह मंदिर नाग देवता की बहन और नागों की देवी मानी जाने वाली देवी मनसा को समर्पित है। यहां बाएं हाथ से पूजा की परंपरा है। सती बहुला ने अपने पति के प्राणों के लिए पूजा की थी। इस कारण श्रद्धालु यहां विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए आते हैं और देवी के चरणों में सर्प के प्रतीक रूप में प्रसाद चढ़ाते हैं।
चंडी स्थान
बिहार के मुंगेर का चंडी स्थान प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि यहां माता सती की बाईं आंख गिरा थी, इसलिए इसे शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त है। यहां मां चंडिका की पूजा की जाती है और दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए आते हैं। ये मंदिर नेत्र रोगियों के लिए लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है कि अंगराज कर्ण यहां रोज सवा मन सोना दान करते थे।
ताराचंडी मंदिर
रोहतास का ताराचंडी मंदिर माता तारा को समर्पित है जो मां दुर्गा का एक रूप मानी जाती है। कहते हैं कि यहां माता चंडी ने असुर चंड का वध किया था, जिसके कारण यह स्थान ताराचंडी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर का नाम तारा महर्षि विश्वामित्र ने रखा था और परशुराम जी ने यहां सहस्त्रबाहु को पराजित करके मां तारा की उपासना की थी। नवरात्रि के समय इस मंदिर में विशेष भीड़ देखने को मिलती है।