जीवनशैली की गड़बड़ी के कारण हाल के वर्षों में लोगों में सुनाई न देने या बहरेपन की समस्या के मामले तेजी से बढ़े हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इसके लिए इयरफोन-हेडफोन के बहुत ज्यादा इस्तेमाल और ध्वनि प्रदूषण को प्रमुख कारण माना जा सकता है। पर क्या सुनाई न देने या बहरेपन की समस्या और इंफर्टिलिटी के बीच कोई संबंध हो सकता है? क्या जिन लोगों को बहरेपन की दिक्कत होती है उनमें नपुंसकता या बांझपन की भी समस्या हो सकती है? हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बहरेपन और बांझपन के बीच एक लिंक के बारे में सूचित किया है।
जानना जरूरी: क्या बहरे लोगों में बांझपन का खतरा अधिक होता है? अध्ययन में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
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एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट और मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस समस्या के बारे में पता किया है। अध्ययन में आठ अलग-अलग जीन का पता चला है जो इसी स्थिति का कारण बन सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अध्ययन के आधार पर न सिर्फ बहरेपन के शिकार लोगों को ठीक करने में मदद मिल सकेगी साथ ही इससे बांझपन के जोखिम को भी कम करने में सहायता मिल सकती है।
पेरौल्ट सिंड्रोम की समस्या है गंभीर
मैनचेस्टर सेंटर फॉर जीनोमिक मेडिसिन में जीनोमिक मेडिसिन के प्रोफेसर बिल न्यूमैन बताते हैं, पेरौल्ट सिंड्रोम के रोगियों पर 10 साल पहले शोध शुरू किया गया था। कुछ आनुवंशिक अध्ययनों के बाद डॉक्टरों ने एक नए जीन की पहचान की और जिसमें हुए बदलाव के कारण इस तरह की समस्या हो सकती है। प्रोफेसर न्यूमैन कहते हैं, यह जीन पेरौल्ट सिंड्रोम का कारण बन सकता है जिसके कारण सुनाई न देने और कुछ लोगों में बांझपन की समस्या हो सकती है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
प्रोफेसर न्यूमैन बताते हैं-
यह जीन माइटोकॉन्ड्रिया नामक कोशिका के एक हिस्से के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि माइटोकॉन्ड्रिया के सही तरीके से काम न करने की स्थिति में शरीर में कुछ ऊतक बहुत संवेदनशील हो जाते हैं। संभव है कि ऐसी स्थिति सुनने वाली ग्रंथियों और डिम्बग्रंथि की समस्याओं का कारण बन सकती हैं। पर कितने फीसदी बहरे व्यक्तियों को बांझपन या नपुसंकता का खतरा होता है, इस बारे में जानने के लिए विस्तार से अध्ययन की आवश्यकता है।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के आधार पर निष्कर्ष में वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन बच्चों को बचपन से ही न सुन पाने की समस्या हो उनमें इन जीनों में परिवर्तन के लिए जांच की जानी चाहिए। ताकि हम समय रहते पहचान सकें कि क्या उनको पेरौल्ट सिंड्रोम की समस्या तो नहीं है? ऐसा करके उन बच्चों को भविष्य में बांझपन या नपुसंकता के खतरे से सुरक्षित रखने में भी मदद मिल सकती है।
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स्रोत और संदर्भ
Mutations in the DBP-Deficiency Protein HSD17B4 Cause Ovarian Dysgenesis, Hearing Loss, and Ataxia of Perrault Syndrome
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