शादी-ब्याह, धार्मिक कार्यक्रम, पार्टी या किसी बड़े आयोजन में डीजे की तेज आवाज को अक्सर मनोरंजन का हिस्सा माना जाता है। स्पीकर के सामने खड़े होकर तेज बीट पर डांस करना कई लोगों को रोमांचक लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ स्थितियों में यही रोमांचक गतिविधि आपके लिए जानलेवा तक हो सकती है?
जानना जरूरी: डीजे की तेज आवाज बढ़ा देती है ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा? जानिए कितना शोर बहुत ज्यादा
डीजे की तेज आवाज सीधे हार्ट अटैक या मौत का कारण है, ऐसा कहना सही नहीं है। लेकिन तेज शोर शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स सक्रिय कर हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। लंबे समय तक या बार-बार तेज आवाज के संपर्क के कारण कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है साथ ही सुनने में भी समस्या हो सकती है
डीजे और हार्ट अटैक के मामले
डीजे और हार्ट अटैक के मामले पहले भी खबरों में रहे हैं।
- सितंबर 2022 में गणेश मूर्ति पंडाल में हनुमान की भूमिका करते हुए कलाकार को अचानक दिल का दौरा पड़ गया। बताया गया कि वहां डीजे की आवाज बहुत तेज होने की वजह से घटना हुई।
- एक अन्य घटना में बरेली में एक कार्यक्रम के दौरान 48 वर्षीय व्यक्ति को हार्ट अटैक आया जिसके कारण उसकी तुरंत मौत हो गई।
अमर उजाला से बातचीत में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अनवर.एम खान कहते हैं इस तरह की घटनाओं में डीजे की तेज आवाज को प्रथमदृश्या दिल का दौरा पड़ने का प्रमुख कारण माना जा सकता है। एहतियात के तौर पर जिन लोगों को हृदय की कमजोरी की दिक्कत रहती है, उन्हें तेज आवाज (जिससे हृदय पर दबाव बढ़ता हो) से दूर रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि कम उम्र के लोगों में इस तरह की दिक्कत हैरान करने वाली है।
डीजे सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण नहीं है, हालांकि ये हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं को बढ़ा देता है जिससे दिल का दौरा और मौत हो सकती है।
तेज आवाज का शरीर पर असर
डॉक्टर कहते हैं, तेज आवाज शरीर में तनाव पैदा करती है। शोर सुनते ही शरीर का सिपैंथिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है। इससे स्ट्रेस हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है, रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं और कुछ समय के लिए दिल की धड़कन तथा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता हैं।
- इसका मतलब यह नहीं कि डीजे की तेज आवाज सुनते ही किसी को हार्ट अटैक आ जाएगा या उसकी जान चली जाएगी।
- लगातार या बहुत तेज शोर शरीर पर ऐसा तनाव डाल सकता है जो पहले से मौजूद हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या अन्य जोखिमों वाले व्यक्तियों के लिए खतरनाक हो सकती है।
अध्ययन में क्या पता चला?
जर्मनी स्थित मेंज यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के एक अध्ययन में पाया गया कि बढ़ता शोर आपके हार्ट रिदम यानी कि हृदय की लय को बिगाड़ देती है। इस स्थिति को मेडिकल की भाषा में एट्रियल फिब्रिलेशन कहा जाता है।
- यह स्थिति दिल के धड़कन की अनियमितता को बढ़ा देती है जिसके कारण रक्त के थक्के बनने, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर की समस्या भी हो सकती है।
- अध्ययनकर्ताओ का कहना है कि कोई भी चीज जो हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालती है या रक्तचाप में बदलाव का कारण बनती है इसके कारण फिब्रिलेशन ट्रिगर हो सकता है।
- डीजे/लाउडस्पीकर की तेज आवाज को हमेशा से हानिकारक माना जाता रहा है, यह न सिर्फ हृदय रोगियों के लिए गंभीर है बल्कि स्वस्थ लोगों में भी हृदय की समस्याओं का कारण बन सकती है।
कितना आवाज खतरनाक?
डब्ल्यूएचओ कहता है 70 डेसिबल (डीबी, यह ध्वनि का मानक है) की आवाज हमारे लिए सहनीय है, इसके संपर्क में भले ही कितनी देर तक रहते हैं, इससे नुकसान नहीं होता है। 70 डेसिबल की आवाज वाशिंग मशीन, कूलर जैसे उपकरणों की होती है।
- हालांकि 85 डीबी से अधिक के शोर में 8 घंटे से अधिक का एक्सपोजर खतरनाक हो सकता है। यह मिक्सर या यातायात की आवाज के बराबर है।
- वहीं यदि यह मानक लगातार 90-100 के बीच बना हुआ है तो इसे गंभीर माना जाता है। शादियों में बजने वाले डीजे की आवाज 100 डीबी से भी अधिक होती है।
एक अन्य अध्ययन में द इंडियन जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक्स में शोधकर्ताओं ने चेताया कि ध्वनि प्रदूषण भ्रूण, शैशवावस्था और किशोरावस्था सहित विकास की आयु वाले बच्चों में कानों की समस्या का कारण बन सकता है। ज्यादा तेज आवाज बच्चों के सीखने की क्षमता को कम कर सकती है।
जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या फिर हार्ट अटैक की दिक्कत रह चुकी है, उनमें तेज आवाज के कारण अचानक जोखिम बढ़ने का खतरा हो सकता है।
-------------
स्रोत:
Air Pollution, Heart Disease and Stroke
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।