Ways To Avoid Heart Attack In Cold Weather: उत्तर प्रदेश के कानपुर में कड़ाके की ठंड और गिरते तापमान ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। स्थानीय अस्पतालों विशेष रूप से हृदय संस्थान की ओपीडी में मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है। आंकड़ों के अनुसार बीते सोमवार को ओपीडी में 1123 रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें से हार्ट अटैक के लक्षण वाले 82 गंभीर मरीजों को तुरंत भर्ती करना पड़ा।
Health Tips: भीषण ठंड में बढ़े हार्ट अटैक-ब्रेन स्ट्रोक के मामले, ये चार लापरवाहियां पहुंचा सकती हैं अस्पताल
Kanpur Heart Attack Cases: कानपुर में इन दिनों भीषण ठंड की वजह से अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है, हैरानी की बात यह है कि बहुत से मरीज तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दे रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि किन गलतियों की वजह से ऐसा हो रहा है और क्या सावधानियां बरतनी जरूरी है।
पर्याप्त कपड़ों की कमी और सीधे ठंड का संपर्क
भीषण ठंड में सबसे बड़ी लापरवाही शरीर को पूरी तरह से न ढकना और सुबह-शाम की ठंडी हवा (शीतलहर) के सीधे संपर्क में आना है। कई लोग सिर, कान और पैरों को खुला छोड़ देते हैं, जबकि शरीर की अधिकांश गर्मी इन्हीं हिस्सों से बाहर निकलती है।
जब ठंडी हवा सीधे शरीर से टकराती है, तो रक्त वाहिकाएं तेजी से सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है और हृदय को शरीर के अंगों तक खून पहुंचाने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है, जो अचानक हार्ट अटैक का कारण बनता है।
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सुबह जल्दी ठंडे पानी से नहाना और शारीरिक व्यायाम
सर्दियों में सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से नहाना या अचानक ठंडे वातावरण में बाहर निकलना ब्रेन स्ट्रोक के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। अचानक होने वाले तापमान परिवर्तन से ब्लड प्रेशर 'स्पाइक' करता है, जिससे मस्तिष्क की महीन नसें फट सकती हैं या उनमें खून का थक्का जम सकता है। इसके अलावा, बिना वार्म-अप किए भीषण ठंड में भारी व्यायाम करना भी दिल पर अतिरिक्त बोझ डालता है। हृदय रोगियों को धूप निकलने के बाद ही टहलने जाना चाहिए।
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खान-पान में गड़बड़ी और पानी का कम सेवन
ठंड के मौसम में प्यास कम लगती है, जिससे लोग पानी पीना कम कर देते हैं। शरीर में पानी की कमी होने से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे 'क्लॉटिंग' या थक्के जमने की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही सर्दियों में नमक और फैटी भारी भोजन का अधिक सेवन भी ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा देता है। जो लोग पहले से ही हाई बीपी या डायबिटीज के मरीज हैं, उनके लिए यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि गाढ़ा खून धमनियों में आसानी से प्रवाहित नहीं हो पाता।
हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक में 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती एक घंटा) सबसे महत्वपूर्ण होता है। अगर आपको सीने में भारीपन, पसीना आना, बाएं हाथ या जबड़े में दर्द, अचानक बोलने में लड़खड़ाहट, चेहरे का तिरछापन या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य ठंड समझकर घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत निकटतम अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में पहुंचें। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से न सिर्फ मरीज की जान बचाई जा सकती है, बल्कि भविष्य में होने वाली अपंगता से भी बचा जा सकता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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