जम्मू में रिंग रोड परियोजना के पूरा होने से सेना और सुरक्षाबलों के वाहनों की आवाजाही समेत भारी वाहनों का आवागमन आसान हो जाएगा। सेना और बीएसएफ के वाहन अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर एलओसी तक आसानी से और जल्दी पहुंच सकेंगे। इसी तरह से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर चलने वाले ट्रकों व अन्य भारी वाहनों को जम्मू शहर के बाहरी क्षेत्र से ही आवाजाही का विकल्प मिलेगा।
Ring Road Project: अब सरहद पर आसानी से पहुंचेंगे सैन्य वाहन, जम्मू शहर के बाहर से गुजरेंगे ट्रक
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वर्तमान में जम्मू-अखनूर रोड से ही सेना, अर्ध सैनिक बल व पुलिस के वाहन पाकिस्तान से लगती सीमा तक पहुंचते हैं। राजोरी और पुंछ जिलों में भी इसी मार्ग से जाते हैं। जम्मू अखनूर से राजोरी पुंछ तक सड़क अभी फोरलेन नहीं है। जम्मू रिंग रोड फोरलेन है जिससे टैंक, अन्य भारी सामरिक मशीनरी लाई और ले जाई जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमान भी रिंग रोड पर उतारे जा सकेंगे।
वहीं जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर जाने वाले सभी वाहन पठानकोट जम्मू नेशनल हाईवे से होते हुए जम्मू शहर और तवी पुल से होकर गुजरते हैं। इससे यातायात पर दबाव रहता है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के जम्मू रिंग रोड के परियोजना निदेशक अजय कुमार रजक के अनुसार जम्मू रिंग रोड परियोजना के दिसंबर 2021 तक पूरा होने के बाद जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर जाने वाले वाहन सांबा जिले के राया मोड़ से ही रिंग रोड से होते हुए जगती नगरोटा में नेशनल हाईवे 44 से जुड़ जाएंगे।
परियोजना जम्मू और सांबा के 60 गांवों को जोड़ेगी। इसमें जम्मू जिले के 54 और सांबा के छह गांव शामिल हैं। कोरोना काल में परियोजना की रफ्तार में कमी आई है लेकिन रिंग रोड परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन होने के बाद अब अन्य कायों में भी तेजी लाई गई है।
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रिंग रोड के पहले चरण का उद्घाटन पूर्व उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू को 28 जुलाई को करना था। इसके लिए सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन ऐन मौके पर लोकार्पण कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। इसके कुछ दिन बाद प्रदेश के उपराज्यपाल को बदल दिया गया।