दक्षिण कश्मीर के काकरान गांव में बुधवार की शाम हुई कश्मीरी हिंदू युवक सतीश कुमार सिंह (50) की हत्या से पूरा गांव सदमे में है। उनके घर पर वीरवार को पड़ोसियों का तांता लगा रहा। घर से रह-रह कर चीख पुकार उठ रही थी। इस निर्मम घटना से उनके मुस्लिम पड़ोसी भी स्तब्ध हैं। घटना के बाद सहरी के लिए उनके घर के चूल्हे भी नहीं जले हैं। उनको मलाल है कि कातिल ने हमले के लिए वह वक्त चुना जब इफ्तार के लिए वे सभी मस्जिदों में नमाज पढ़ने गए थे।
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कुलगाम में आतंकियों निशाना बने सतीश सिंह के परिजन
- फोटो : बासित जरगर
इस घटना से दुखी सतीश के पड़ोसी अब्दुल रहमान तांत्रे कहते हैं कि हमने अपना रात का खाना या कुछ भी नहीं खाया है। पूरा गांव मातम मना रहा है। सतीश एक सज्जन व्यक्ति थे। सतीश की चिता के लिए लकड़ी एकत्र करने वाले उनके पड़ोसियों ने बताया कि सतीश बहुत मिलनसार थे। वह आतंकवाद के चरम के दौरान भी यहां से बाहर नहीं गए। कुछ पड़ोसी उनके परिवार को सांत्वना देते भी नजर आए। उनके छोटे भाई बिटू सिंह ने बताया कि भइया एक निजी लोड कैरियर चालक के रूप में काम करता थे, उन्होंने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया।
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कुलगाम में आतंकियों निशाना बने सतीश सिंह के परिजन
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सतीश कुमार सिंह अपने पीछे मां, पत्नी व छह से 15 साल की उम्र की तीन बेटियां छोड़ गए हैं। बिटू सिंह ने कहा कि यह घटना बुधवार शाम करीब 7.05 बजे की है। जब एक अज्ञात आतंकी ने उनके भाई को गोली मार दी। उन्होंने कहा कि वे तीन पीढ़ियों से गांव में रह रहे हैं और 1990 के दशक की शुरुआत में जब आतंकवाद शुरू हुआ था, उस साल कश्मीरी पंडितों ने जम्मू और देश में दूसरी जगहों पर शरण लेने के लिए घाटी छोड़ दी थी।
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कुलगाम में आतंकियों निशाना बने सतीश सिंह के परिजन
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लेकिन, हमें अतीत में कभी भी खतरा महसूस नहीं हुआ। गांव में हम आठ राजपूत परिवार हैं और स्थानीय मंदिर में एक पुलिस गार्ड तैनात है। उन्होंने कुछ समय पहले एक बीमारी के कारण अपने पिता को खो दिया है और उनकी मां पुष्पा देवी अपने बेटे की हत्या से सदमे में हैं। बिट्टू कहते हैं कि हमारे मुस्लिम पड़ोसी भी अपनी संवेदना व्यक्त करने आ रहे हैं। वे और क्या कर सकते हैं, वे भी असहाय हैं।
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सतीश के भाई ने कहा-जीवन सबके लिए कीमती
बिट्टू सिंह कहते हैं कि उनके समुदाय अब घाटी से बाहर जाने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा, जीवन सभी के लिए कीमती है और हमारी भी प्राथमिकता है। हालांकि पुलिस व अन्य अफसर उनसे मुलाकात कर हर संभव समर्थन का वादा कर रहे हैं। उन्होंने उत्तर कश्मीर के बारामुला जिले में लगे एक पोस्टर का हवाला दिया जिसमें हिंदुओं को कश्मीर छोड़ने के लिए कहा गया था। लश्कर-ए-इस्लामी नाम के एक अज्ञात समूह ने उस गांव के निवासियों को धमकी दी थी जहां कश्मीरी पंडितों का एक समूह रहता है। हालांकि पुलिस का कहना है कि वह इस पोस्टर की विश्वसनीयता के बारे में जांच कर रही है। पुलिस ने कहा कि शांति और शांति भंग करने के लिए ऐसी धमकी देने वाले बदमाशों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा और उनसे सख्ती से निपटा जाएगा।