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द रियल कश्मीर फाइल्स : भारत मैच जीतता या हारता, हमारे घरों पर पथराव जरूर होता, जश्न के लिए जबरन लिए जाते थे पैसे

Fri, 01 Apr 2022 02:38 PM IST
kumar गुलशन कुमार विमल शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
विमल शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 01 Apr 2022 02:38 PM IST
सार

कश्मीरी पंडित सुरेश रैना ने बताया कि एक गुट के लोग मैच होने या अन्य धार्मिक जलसे के दौरान कश्मीर पंडितों का जीना मुहाल कर देते थे। भारत-पाकिस्तान के टीमों के बीच मैच होने पर सभी कश्मीरी पंडितों से जबरन चंदा वसूला जाता था। पाकिस्तान के टीम हारे या जीते हम लोगों के घरों में पथराव यहां तक की आगजनी भी हुआ करती थी।

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The Real Kashmir Files: Kashmiri Pandit Surendra raina told during 1980s India would win or lose stones pelted at their homes money was forcibly taken for celebration
कश्मीरी पंडित सुरैंद्र कुमार रैना। - फोटो : अमर उजाला

कश्मीर घाटी में लंबे समय से ही कश्मीरी पंडितों के लिए नफरत के बीज बोए जा रहे थे। इसकी शुरुआत वर्ष 1975 से पहले ही हो चुकी थी। अस्सी का दशक आते-आते खुलेआम घरों को खाली कर जाने की धमकी दी जाने लगी। वर्ष 1985 के बाद घाटी में हिंदुओं का रहना मुश्किल हो गया था। महिलाओं और लड़कियों को एक गुट लगातार निशाना बना रहा था। उनका बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। यह आपबीती है मूल रूप से रैनावाड़ी श्रीनगर के रहने वाले सुरेंद्र कुमार रैना की।



सुरेंद्र रैना ने बताया कि नब्बे का दौर आते-आते घाटी में रहना मुश्किल हो गया था। सरकारी कर्मियों समेत लोगों को दफ्तर जाने के लिए संषर्घ करना पड़ता था। चारों तरफ दहशत का माहौल बना हुआ था। उन्होंने बताया कि इसी बीच एक दिन भारत-पाकिस्तान का मैच चल रहा था। पाकिस्तान की टीम हारने लगी तो दहशतगर्द मोहल्ले में नारेबाजी करने के साथ कश्मीरी पंडित महिलाओं के ऊपर कमेंट करने लगे। इसके बाद देश विरोधी नारे शुरू हो गए। देर रात होते-होते सभी के घरों में पथराव होने लगा। उस दिन लगा की अब यहां जान बचाना मुश्किल है।
 

The Real Kashmir Files: Kashmiri Pandit Surendra raina told during 1980s India would win or lose stones pelted at their homes money was forcibly taken for celebration
पलायन के बाद खंडर हुआ एक घर। - फोटो : अमर उजाला

घरों से निकलना मुश्किल हो गया था
अभी जम्मू के दुर्गानगर में रहने वाले रैना ने बताया कि एक गुट के लोग मैच होने या अन्य धार्मिक जलसे के दौरान कश्मीर पंडितों का जीना मुहाल कर देते थे। वर्ष 1990 में महिलाओं का घरों से निकलना मुश्किल हो गया था। सबसे ज्यादा परेशानी क्रिकेट मैच के दौरान होती थी। भारत-पाकिस्तान की टीमों के बीच मैच होने पर सभी कश्मीरी पंडितों से जबरन चंदा वसूला जाता था। पाकिस्तान की टीम हारे या जीते हम लोगों के घरों में पथराव यहां तक कि आगजनी भी हुआ करती थी। छोटे बच्चों को मैच वाले दिन घरों से बाहर नहीं जाने देते थे। 

The Real Kashmir Files: Kashmiri Pandit Surendra raina told during 1980s India would win or lose stones pelted at their homes money was forcibly taken for celebration
1988 Massacre of Kashmiri Pandits - फोटो : अमर उजाला

कश्मीरी पंडित धर्म बदल लें या कश्मीर छोड़ दें
सुरेंद्र कुमार रैना ने बताया कि टीका लाल टपलू की हत्या के बाद कश्मीरी पंड़ितों को टारगेट कर मारा जाने लगा। इसका कारण उनका देशभक्त होना था। उनकी हत्या इसलिए भी हुई थी कि वह हिंदूवादी संगठन से जुड़े हुए थे। सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने वाले पंडितों को मारने के लिए दहशतगर्दों ने एक लिस्ट भी बनाई थी। इसके बाद वे लोग लगातार उनके निशाने पर रहने लगे। वर्ष 1990 के शुरुआती पखवाड़े में दहशतगर्दों ने एक सामूहिक रैली निकाली थी। इसके बाद पंडितों का नरसंहार शुरू हो गया था। पंडितों को कश्मीर छोड़ने या फिर धर्म बदलने के लिए लगातार धमकाया जाने लगा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें घाटी छोड़नी पड़ी।

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1990 Massacre of Kashmiri Pandits - फोटो : अमर उजाला

आसपास के लोग बन गए दुश्मन
कश्मीरी पंडित रैना ने बताया कि इलाके में कई मुस्लिम लोग रहते थे। हम एक-दूसरे के दुख-सुख में लगातार साथ रहते थे। लेकिन, फिर हवा का रुख सांप्रदायिक हो गया। धमकियों का आलम यह था कि अपने ही लोग अब पराए हो गए थे। वह भी लगातार इलाके को छोड़कर दूसरी जगह जाने को कह रहे थे। इससे लग रहा था कि कभी भी सकता है। दहशतगर्द आम मुस्लिमों को पंडितों के खिलाफ भड़का रहे थे। उनको पंडितों के खिलाफ कई तरह से उकसाया जा रहा था। जिससे वह पूरी तरह से दहशतगर्दों का साथ दें।

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lal chowk srinagar - फोटो : बासित जरगर

केंद्र सरकार से उम्मीद 
पीड़ित रैना ने बताया कि केंद्र सरकार कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए योजना चला रही है। यह बेहतर है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों की सम्मान सहित घर वापसी होने के साथ उनकी जमीनों पर अधिकार दिलवाना चाहिए। इसके अलावा जिस तरह के हालात घाटी में हैं उसके हिसाब से उनकी सुरक्षा की गारंटी भी देनी होगी।

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