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किसान परेशान: कश्मीर में लॉकडाउन ने तबाह की स्ट्रॉबेरी की खेती, कारोबार में आई 30 प्रतिशत की गिरावट

Fri, 28 May 2021 10:12 AM IST
प्रशांत कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 28 May 2021 10:12 AM IST
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Strawberry in kashmir, 30 percent decline in strawberry cultivation
स्ट्रॉबेरी की खेती - फोटो : बासित जरगर

कोरोना की मार का प्रभाव स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसानों पर भी पड़ा है। किसानों के अनुसार इस बार खेती में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है लेकिन लॉकडाउन के कारण उनके व्यापार में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। फसल श्रीनगर के अलावा और कहीं नहीं जा सकी, इसलिए दाम भी पिछले साल से कम मिले हैं। इस विषय में हॉर्टिकल्चर विभाग के निदेशक ने कहा है कि विभाग ने किसानों को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है, और उनके लिए डिव कॉम से श्रीनगर में दो जगहों पर इनकी सेल के लिए प्लेटफॉर्म लगाने की अनुमति मांगी है।



बता दें कि स्ट्रॉबेरी की खेती कश्मीर में बहुत पहले से नहीं होती है। पारंपरिक खेती में नुकसान होने के कारण कई किसानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती को अपनाया, और मौसम अनुकूल होने के कारण इसने घाटी में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार पैदा किए।

Strawberry in kashmir, 30 percent decline in strawberry cultivation
स्ट्रॉबेरी की खेती - फोटो : बासित जरगर

इस बार की फसल केवल श्रीनगर में ही बेची जा रही है। स्ट्राबेरी की उम्र कम होती है इसलिए दूसरे राज्यों में बेचने के लिए इसे हवाई जहाज से ही भेजा जाता है। किसानों के मुताबिक स्ट्रॉबेरी के दामों में 30 से 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसान मंज़ूर अहमद ने बताया कि इस बार पिछले साल के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत ज्यादा अच्छी फसल हुई थी। लेकिन, लॉकडाउन के चलते उन्हें सही बाजार नहीं मिल पाया।

Strawberry in kashmir, 30 percent decline in strawberry cultivation
स्ट्रॉबेरी की खेती - फोटो : बासित जरगर

उन्होंने बताया कि पहले उनकी स्ट्रॉबेरी श्रीनगर के साथ साथ उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर के बाजारों में बिकती थी और अच्छा दाम मिलता था। इसके अलावा जम्मू, पुंछ, राजोरी, किश्तवाड़, आदि जगहों पर भी उनका माल जाता था। इस बार पूरी फसल करीब 80 रुपये किलो के हिसाब से बिक गई। एक अन्य किसान शब्बीर अहमद ने कहा कि सरकार इस पर ध्यान दे, कोल्ड स्टोर बनाए और इस फल को जहाजों से बाकी राज्यों में भेजे, ताकि किसान नुकसान से बच सकें।
 

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स्ट्रॉबेरी की खेती - फोटो : बासित जरगर
बता दें कि किसानों को सरकार ने श्रीनगर की स्थानीय मंडी में स्ट्रॉबेरी बेचने के लिए मदद दी है। इस बार कीमतों में गिरावट है क्योंकि इसकी बिक्री केवल श्रीनगर शहर में हुई है। हॉर्टिकल्चर विभाग के निदेशक एजाज अहमद भट ने अमर उजाला को बताया कि इस बार किसानों को बाजारों में बेचने में दिक्कत जरूर आई, लेकिन उन्हें हॉर्टिकल्चर कैंपस में अपना प्लेटफॉर्म लगाने की अनुमति मिली है।
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स्ट्रॉबेरी की खेती - फोटो : बासित जरगर

एजाज ने बताया कि फसल को बेचने के लिए अब केवल एक सप्ताह का समय है। इसलिए, उन्होंने कश्मीर के डिव कॉम से स्ट्रॉबेरी के किसानों के लिए नेहरूपार्क और निशात में प्लेटफॉर्म स्थापित करने के लिए अनुमति मांगी है। फेरीवालों को इजाजत नहीं है, इसलिए थोड़ी दिक्कत आई है। जब सब्जी वालों को बेचने की अनुमति है तो इन्हें भी मिलनी चाहिए, ताकि उससे किसानों को मदद मिल सके।

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