कोरोना की मार का प्रभाव स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसानों पर भी पड़ा है। किसानों के अनुसार इस बार खेती में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है लेकिन लॉकडाउन के कारण उनके व्यापार में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। फसल श्रीनगर के अलावा और कहीं नहीं जा सकी, इसलिए दाम भी पिछले साल से कम मिले हैं। इस विषय में हॉर्टिकल्चर विभाग के निदेशक ने कहा है कि विभाग ने किसानों को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है, और उनके लिए डिव कॉम से श्रीनगर में दो जगहों पर इनकी सेल के लिए प्लेटफॉर्म लगाने की अनुमति मांगी है।
किसान परेशान: कश्मीर में लॉकडाउन ने तबाह की स्ट्रॉबेरी की खेती, कारोबार में आई 30 प्रतिशत की गिरावट
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इस बार की फसल केवल श्रीनगर में ही बेची जा रही है। स्ट्राबेरी की उम्र कम होती है इसलिए दूसरे राज्यों में बेचने के लिए इसे हवाई जहाज से ही भेजा जाता है। किसानों के मुताबिक स्ट्रॉबेरी के दामों में 30 से 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसान मंज़ूर अहमद ने बताया कि इस बार पिछले साल के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत ज्यादा अच्छी फसल हुई थी। लेकिन, लॉकडाउन के चलते उन्हें सही बाजार नहीं मिल पाया।
उन्होंने बताया कि पहले उनकी स्ट्रॉबेरी श्रीनगर के साथ साथ उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर के बाजारों में बिकती थी और अच्छा दाम मिलता था। इसके अलावा जम्मू, पुंछ, राजोरी, किश्तवाड़, आदि जगहों पर भी उनका माल जाता था। इस बार पूरी फसल करीब 80 रुपये किलो के हिसाब से बिक गई। एक अन्य किसान शब्बीर अहमद ने कहा कि सरकार इस पर ध्यान दे, कोल्ड स्टोर बनाए और इस फल को जहाजों से बाकी राज्यों में भेजे, ताकि किसान नुकसान से बच सकें।
एजाज ने बताया कि फसल को बेचने के लिए अब केवल एक सप्ताह का समय है। इसलिए, उन्होंने कश्मीर के डिव कॉम से स्ट्रॉबेरी के किसानों के लिए नेहरूपार्क और निशात में प्लेटफॉर्म स्थापित करने के लिए अनुमति मांगी है। फेरीवालों को इजाजत नहीं है, इसलिए थोड़ी दिक्कत आई है। जब सब्जी वालों को बेचने की अनुमति है तो इन्हें भी मिलनी चाहिए, ताकि उससे किसानों को मदद मिल सके।