{"_id":"6ac5668fbc22cdab90060de4","slug":"development-news-samba-news-c-10-1-jmu1063-1032494-2026-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: जम्मू-कश्मीर में खुलेंगे ग्लोबल करियर के दरवाजे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: जम्मू-कश्मीर में खुलेंगे ग्लोबल करियर के दरवाजे
विज्ञापन
-जीसीसी के माध्यम से बनेगी राह, स्थानीय युवाओं को वैश्विक कंपनियों से जोड़ने की तैयारी
-मिशन युवा और कौशल विकास विभाग बनाएंगे रोजगार का पूरा नेटवर्क
-आईआईएम जम्मू में नाै और 10 अक्तूबर को होने वाले जीसीसी समिट में सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थान करेंगे मंथन
अमर उजाला ब्यूरो,
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के युवाओं को आने वाले समय में रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) को विकसित करने की तैयारी है। आईआईएम जम्मू में नाै और 10 अक्तूबर को होने वाले जीसीसी समिट में सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थान इस बात पर मंथन करेंगे कि जम्मू-कश्मीर को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के उभरते केंद्र के रूप में कैसे विकसित कर स्थानीय प्रतिभाओं को वैश्विक कंपनियों से कैसे जोड़ा जाए।
श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव कुमार राजीव रंजन ने मंगलवार को बताया कि हमारा लक्ष्य स्पष्ट है। जम्मू-कश्मीर के किसी भी जिले का युवा वैश्विक कंपनी में करियर बनाने के लिए अपना घर छोड़ने को मजबूर न हो। वैश्विक अवसर अपने प्रदेश में ही उपलब्ध हो। उन्होंने बताया कि जीसीसी केवल कॉल सेंटर या डेटा सेंटर नहीं होते। ये कंपनियों के अपने केंद्र होते हैं, जहां तकनीक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, वित्त, अकाउंटिंग, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, मानव संसाधन, कानूनी प्रक्रियाओं और ग्राहक सेवाओं जैसे काम किए जाते हैं। ऐसे केंद्रों के लिए सबसे बड़ी जरूरत प्रशिक्षित मानव संसाधन की होती है और यही जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे बड़ा अवसर भी है।
हर साल बाहर जा रही स्थानीय प्रतिभा
मिशन युवा बेसलाइन सर्वे 2024-25 के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में युवा बेरोजगारी दर 17.4 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 10.2 प्रतिशत है। सितंबर 2025 तक 3.6 लाख से अधिक शिक्षित युवा रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत थे। बड़ी संख्या में इंजीनियर, अकाउंटेंट, विश्लेषक और अन्य पेशेवर रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। वहीं, भारत में जीसीसी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। 2030 तक देश में इससे जुड़े पेशेवरों की संख्या करीब 34.6 लाख पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के लिए अपने शिक्षित युवाओं को इसी क्षेत्र से जोड़ने का अवसर तैयार हो सकता है।
विज्ञापन
इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं होंगे अवसर
रोजगार के अवसर केवल इंजीनियरों के लिए नहीं हैं। वित्त और अकाउंटिंग, डेटा एनालिटिक्स, सॉफ्टवेयर, साइबर सुरक्षा, मानव संसाधन, ग्राहक सेवा, लीगल प्रोसेस और हेल्थकेयर डेटा जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नौकरियां हैं। विशेष प्रशिक्षण के जरिए कॉमर्स, साइंस और ह्यूमैनिटीज के स्नातकों को भी इन भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा सकता है।
मिशन युवा से जुड़ेगा स्थानीय कारोबार
जम्मू-कश्मीर सरकार का मिशन युवा पांच वर्षों में 1.37 लाख उद्यम स्थापित करने और 4.25 लाख रोजगार पैदा करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। मई 2026 तक 1.07 लाख से अधिक आवेदन मिल चुके हैं। इनमें से 25 हजार मामलों को मंजूरी दी गई और 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई।
कंपनी बताएगी जरूरत, सरकार तैयार करेगी युवा
श्रम एवं रोजगार विभाग जीसीसी कंपनियों की वास्तविक जरूरत के आधार पर प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार करने की योजना बना रहा है। कंपनियां बताएंगी कि उन्हें किन पदों पर कितने लोगों की जरूरत है और कब जरूरत है। इसके बाद विश्वविद्यालयों, कौशल विकास विभाग और आईटीआई नेटवर्क के साथ मिलकर उसी अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पीएम सेतु के तहत अपग्रेड किए जा रहे आईटीआई नेटवर्क का इस्तेमाल आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क ऑपरेशन और फैसिलिटी से जुड़े तकनीकी पदों के लिए युवाओं को तैयार करने में किया जा सकता है। जिला रोजगार एवं परामर्श केंद्र भी युवाओं को जीसीसी में उपलब्ध करियर विकल्पों की जानकारी देंगे।
बाहर काम कर रहे अपने पेशेवरों को वापस लाने पर जोर
विभाग जम्मू-कश्मीर के उन पेशेवरों का रजिस्टर तैयार करेगा, जो देश और विदेश के जीसीसी में काम कर रहे हैं। ऐसे अनुभवी पेशेवर नए केंद्रों के लिए तैयार मानव संसाधन उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय युवाओं को नेतृत्व और प्रशिक्षण भी दे सकते हैं। जीसीसी को शिक्षित महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण रोजगार माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।
विज्ञापन
-मिशन युवा और कौशल विकास विभाग बनाएंगे रोजगार का पूरा नेटवर्क
-आईआईएम जम्मू में नाै और 10 अक्तूबर को होने वाले जीसीसी समिट में सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थान करेंगे मंथन
अमर उजाला ब्यूरो,
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के युवाओं को आने वाले समय में रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) को विकसित करने की तैयारी है। आईआईएम जम्मू में नाै और 10 अक्तूबर को होने वाले जीसीसी समिट में सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थान इस बात पर मंथन करेंगे कि जम्मू-कश्मीर को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के उभरते केंद्र के रूप में कैसे विकसित कर स्थानीय प्रतिभाओं को वैश्विक कंपनियों से कैसे जोड़ा जाए।
श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव कुमार राजीव रंजन ने मंगलवार को बताया कि हमारा लक्ष्य स्पष्ट है। जम्मू-कश्मीर के किसी भी जिले का युवा वैश्विक कंपनी में करियर बनाने के लिए अपना घर छोड़ने को मजबूर न हो। वैश्विक अवसर अपने प्रदेश में ही उपलब्ध हो। उन्होंने बताया कि जीसीसी केवल कॉल सेंटर या डेटा सेंटर नहीं होते। ये कंपनियों के अपने केंद्र होते हैं, जहां तकनीक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, वित्त, अकाउंटिंग, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, मानव संसाधन, कानूनी प्रक्रियाओं और ग्राहक सेवाओं जैसे काम किए जाते हैं। ऐसे केंद्रों के लिए सबसे बड़ी जरूरत प्रशिक्षित मानव संसाधन की होती है और यही जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे बड़ा अवसर भी है।
विज्ञापन
हर साल बाहर जा रही स्थानीय प्रतिभा
मिशन युवा बेसलाइन सर्वे 2024-25 के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में युवा बेरोजगारी दर 17.4 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 10.2 प्रतिशत है। सितंबर 2025 तक 3.6 लाख से अधिक शिक्षित युवा रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत थे। बड़ी संख्या में इंजीनियर, अकाउंटेंट, विश्लेषक और अन्य पेशेवर रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। वहीं, भारत में जीसीसी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। 2030 तक देश में इससे जुड़े पेशेवरों की संख्या करीब 34.6 लाख पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के लिए अपने शिक्षित युवाओं को इसी क्षेत्र से जोड़ने का अवसर तैयार हो सकता है।
विज्ञापन
इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं होंगे अवसर
रोजगार के अवसर केवल इंजीनियरों के लिए नहीं हैं। वित्त और अकाउंटिंग, डेटा एनालिटिक्स, सॉफ्टवेयर, साइबर सुरक्षा, मानव संसाधन, ग्राहक सेवा, लीगल प्रोसेस और हेल्थकेयर डेटा जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नौकरियां हैं। विशेष प्रशिक्षण के जरिए कॉमर्स, साइंस और ह्यूमैनिटीज के स्नातकों को भी इन भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा सकता है।
मिशन युवा से जुड़ेगा स्थानीय कारोबार
जम्मू-कश्मीर सरकार का मिशन युवा पांच वर्षों में 1.37 लाख उद्यम स्थापित करने और 4.25 लाख रोजगार पैदा करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। मई 2026 तक 1.07 लाख से अधिक आवेदन मिल चुके हैं। इनमें से 25 हजार मामलों को मंजूरी दी गई और 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई।
कंपनी बताएगी जरूरत, सरकार तैयार करेगी युवा
श्रम एवं रोजगार विभाग जीसीसी कंपनियों की वास्तविक जरूरत के आधार पर प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार करने की योजना बना रहा है। कंपनियां बताएंगी कि उन्हें किन पदों पर कितने लोगों की जरूरत है और कब जरूरत है। इसके बाद विश्वविद्यालयों, कौशल विकास विभाग और आईटीआई नेटवर्क के साथ मिलकर उसी अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पीएम सेतु के तहत अपग्रेड किए जा रहे आईटीआई नेटवर्क का इस्तेमाल आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क ऑपरेशन और फैसिलिटी से जुड़े तकनीकी पदों के लिए युवाओं को तैयार करने में किया जा सकता है। जिला रोजगार एवं परामर्श केंद्र भी युवाओं को जीसीसी में उपलब्ध करियर विकल्पों की जानकारी देंगे।
बाहर काम कर रहे अपने पेशेवरों को वापस लाने पर जोर
विभाग जम्मू-कश्मीर के उन पेशेवरों का रजिस्टर तैयार करेगा, जो देश और विदेश के जीसीसी में काम कर रहे हैं। ऐसे अनुभवी पेशेवर नए केंद्रों के लिए तैयार मानव संसाधन उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय युवाओं को नेतृत्व और प्रशिक्षण भी दे सकते हैं। जीसीसी को शिक्षित महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण रोजगार माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।