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सेना दिवस विशेष: जानें क्या थे शहादत से पहले कारगिल के जांबाज विक्रम बत्रा के अंतिम शब्द

Sun, 15 Jan 2017 08:50 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 15 Jan 2017 08:50 PM IST
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story of kargil warrior vikram batra
पाकिस्तानी आतंकी चोटी के टॉप पर थे और मशीन गन से उपर चढ़ रहे भारतीय सैनिकों पर गोलियां बरसा रहे थे। लेकिन बतरा ने हार नहीं मानी और एक के बाद एक पाकिस्तानी को ढेर करते हुए इस चोटी पर कब्जा कर लिया। बतरा खुद गंभीर रूप से घायल भी हुए लेकिन आखिरकार लंबी गोलीबारी के बाद इस पर अपना कब्जा कर लिया। 4875 प्वांइट पर कब्जे के दौरान भी बतरा ने बेहद बहादुरी दिखाई और इस परमवीर ने सैनिक को यह कहकर पीछे कर दिया कि तू बाल-बच्चेदार है, पीछे हट जा। खुद आगे आकर बतरा ने दुश्मनों की गोलियां खाई। उनके आखिरी शब्द थे 'जय माता दी'।
जब जब कारगिल युद्ध की बात आती है सेना के एक ऐसे जांबाज का नाम जरूर आता है जिसने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों की धज्जियां उड़ा दी थी। सेना के इस जांबाज विक्रम बत्रा को शेरशाह के नाम से जाना जाता था। जानें विक्रम बत्रा के जीवन की अनकही कहानी: 
story of kargil warrior vikram batra
vikram batra - फोटो : File Photo
9 सितंबर 1974 को जन्मे विक्रम ने स्नातक के बाद सेना में जाने का पूरा मन बना लिया और सीडीएस (सम्मिलित रक्षा सेवा) की भी तैयारी शुरू की। 
story of kargil warrior vikram batra
vikram batra - फोटो : ADGPI- Indian Army
विक्रम को ग्रेजुएशन के बाद हांगकांग में भारी वेतन में मर्चेन्ट नेवी में भी नौकरी मिल रही थी, लेकिन सेना में जाने के जज्बे वाले विक्रम ने इस नौकरी को ठुकरा दिया। विक्रम को 1997 को जम्मू के सोपोर में सेना की 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली।
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story of kargil warrior vikram batra
kargil
1999 में कारगिल की जंग में विक्रम को भी बुलाया गया। इस दौरान विक्रम के अदम्य साहस के कारण उन्हे प्रमोशन भी मिला और वे कैप्टन बना दिए गए। 
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story of kargil warrior vikram batra
vikram batra - फोटो : File Photo
श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे महत्त्वपूर्ण 5140 चोटी को पाक सेना से मुक्त करवाने का जिम्मा भी कैप्टन विक्रम बत्रा को दिया गया। बेहद दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद विक्रम बत्रा ने अपने साथियों के साथ 20 जून 1999 को इस पोस्ट पर विजय हासिल की। 
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