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रोहिंग्याओं पर खूब बरसी कृपा, बिजली के बिल ही नहीं आधार भी हैं इनके पास, अब सरकार की ये तैयारी

Sat, 14 Dec 2019 11:16 AM IST
प्रशांत कुमार बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 14 Dec 2019 11:16 AM IST
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Rohingya biometric card will be ready, 15 thousand Rohingya are living in different areas of Jammu
रोहिंग्या - फोटो : अमर उजाला

नागरिकता संशोधन बिल (कैब) के लागू होने के बाद जम्मू-कश्मीर में रह रहे रोहिंग्याओं का अब नए सिरे से रिकॉर्ड तैयार होगा। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद इनका बायोमेट्रिक रिकॉर्ड रखा जाएगा। पूरा ब्योरा तैयार होने के बाद इसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा ताकि अगली कार्रवाई की जा सके। जम्मू और सांबा में लगभग 15 हजार रोहिंग्या अवैध रूप से बसे हुए हैं। गृह विभाग के सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश में बसे रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों का ब्योरा मांगा गया है।

Rohingya biometric card will be ready, 15 thousand Rohingya are living in different areas of Jammu
रोहिंग्या मुस्लिम - फोटो : यूएन हिंदी समाचार

यह ब्योरा बायोमेट्रिक आधार पर तैयार करना है। इस कवायद को पूरा कर डाटाबेस जल्द से जल्द भेजने को कहा गया है। हालांकि, पूर्व गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी 2018 में बायोमीट्रिक ब्योरा जुटाने के आदेश दिए थे, लेकिन यह कवायद पूरी नहीं हो सकी थी। अब नए सिरे से रिकॉर्ड तैयार होगा। नागरिकता संशोधन बिल के पास होने के बाद अवैध रूप से बसे रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों को देश से बाहर भेजने के लिए आवश्यक तैयारियों के सिलसिले में यह कवायद की जा रही है ताकि कोई भी यहां न रह सके। 2017 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जम्मू-कश्मीर में दो हजार रोहिंग्या परिवार रह रहे हैं। इनके जिहादी ग्रुप से लिंक होने की आशंका है। इन्हें चिह्नित कर बाहर किया जाएगा।

Rohingya biometric card will be ready, 15 thousand Rohingya are living in different areas of Jammu
रोहिंग्या - फोटो : अमर उजाला

जम्मू में बसे रोहिंग्याओं को निकालने के लिए सबसे पहले अमरनाथ भूमि आंदोलन के दौरान 2008 में आंदोलन शुरू हुआ था। इसके बाद भाजपा-पीडीपी की सरकार बनने के बाद 2015 में इस आंदोलन ने जोर पकड़ा। पैंथर्स पार्टी समेत विभिन्न हिंदुवादी संगठनों तथा व्यापारिक संगठनों ने भी रोहिंग्याओं को बाहर निकालने के लिए समय-समय पर आंदोलन किया। म्यांमार में सैन्य कार्रवाई से डरकर 2007 से 2015 के बीच जम्मू में हजारों रोहिंग्या परिवार आकर बसे। जम्मू में नरवाल, भठिंडी, छन्नी हिम्मत, भगवतीनगर समेत 22 स्थानों पर आकर बसे।

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रोहिंग्या शरणार्थी

इसके साथ ही कई परिवार ने सांबा व कठुआ में भी डेरा जमाया। ये सभी यहां खाली पड़े प्लाटों में किराए पर रह रहे हैं। नवंबर 2017 में यूनाइटेड नेशंस हाई कमीशन फॉर रिफ्यूजी ने जम्मू में पांच रोहिंग्या बस्तियों का दौरा भी किया था। बताते हैं कि कमीशन की ओर से 16500 लोगों को किसी प्रकार की प्रताड़ना से बचने के लिए पहचान पत्र जारी किया गया है जिसके आधार पर वे यहां आकर बसे।

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रोहिंग्या - फोटो : अमर उजाला
विभागीय मिलीभगत से इन्होंने बिजली कनेक्शन और पानी का कनेक्शन भी ले रखा है। कई के पास तो आधार कार्ड तक हैं। जिला प्रशासन की जांच में आधार कार्ड होने की बात सामने आ चुकी है। यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी तथा भाजपा के मंत्रियों का एक समूह गठित किया था, लेकिन इस समूह की दो-तीन बैठकें ही हो पाईं थीं।

कैब के पास होने से रोहिंग्याओं के अब जम्मू में गिने चुने दिन ही रह गए हैं। विश्वास है कि जल्द ही घुसपैठिया मुक्त भारत होगा। जम्मू में रह रहे रोहिंग्याओं के चोरी तथा अन्य अपराधों में संलिप्त होने की बात सामने आ चुकी है। केंद्र सरकार को जल्द से जल्द इन्हें बाहर भेजने की कार्रवाई को सुनिश्चित करना चाहिए। - अंकुर शर्मा, एडवोकेट हाईकोर्ट (रोहिंग्याओं को बाहर करने के आंदोलन में शामिल रहे)

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