अपने ही घर में करीब सात माह से नजरबंद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं मौजूदा सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला को रिहा कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को उन पर से पहले जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) तत्काल प्रभाव से हटाया और फिर रिहा कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर में पांच दिन पहले रविवार को एक नए सियासी मोर्चे ‘अपनी पार्टी’ के गठन के बाद प्रशासन का यह फैसला कई मायनों में अहम माना जा रहा है।
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फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : बासित जरगर
रिहा होने के तुरंत बाद फारूक अब्दुल्ला ने उन सांसदों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनकी रिहाई के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि सारे नेताओं के रिहा होने के पश्चात ही वह भविष्य के बारे में कोई निर्णय ले पाएंगे। अब्दुल्ला ने कहा, मैं आजाद हूं...उम्मीद है कि बाकी नेता भी जल्द ही रिहा होंगे। सभी सांसदों का आभार जिन्होंने मेरी रिहाई के लिए लड़ाई लड़ी।
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फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : बासित जरगर
इससे पहले केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के गृह सचिव शालीन काबरा की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि श्रीनगर के उपायुक्त की ओर से 15 सितंबर को डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर लगाए पीएसए और फिर 13 दिसम्बर को इसकी अवधि तीन महीने के लिए बढ़ाए जाने को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। पिछले साल पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने से एक दिन पहले ही फारूक अब्दुल्ला कोे घर में नजरबंद कर दिया गया था।
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फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : बासित जरगर
फारूक पहले मुख्यमंत्री थे जिनको पीएसए के तहत नजरबंद किया गया था। फारूक के खिलाफ पीएसए 15 सितंबर को लगाया गया था। उसके कुछ घंटे पहले ही एमडीएमके नेता वाइको की याचिका पर उच्चतम न्यायालय सुनवाई करने वाला था। वाइको का दावा था कि फारूक अब्दुल्ला को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। जन सुरक्षा कानून के तहत किसी व्यक्ति को तीन महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसे दो वर्ष की अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है।
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फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : बासित जरगर
नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष को रिहा करने का फैसला शुक्रवार को तीन महीने की अवधि पूरी होने से ठीक पहले लिया गया है। शुक्रवार दोपहर को उपायुक्त श्रीनगर शाहिद इकबाल चौधरी अब्दुल्ला के आवास पर गए और उन्हें रिहाई का आदेश सौंपा। उनकी रिहाई के तुरंत बाद नेकां ने बयान जारी कर निर्णय का स्वागत किया और केंद्र शासित प्रशासन से अपील की कि पार्टी के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित अन्य नेताओं को भी रिहा किया जाए। नेकां के बयान के मुताबिक फारूक की रिहाई जम्मू-कश्मीर में वास्तविक राजनीतिक प्रक्रिया की पुनर्बहाली की तरफ सही कदम है।