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लेहः बदले हालात पर लोगों की प्रतिक्रियाएं, पहले कर्मचारियों की मुट्ठियां गर्म करनी पड़ती थीं- छात्रा

Tue, 03 Sep 2019 05:22 PM IST
प्रशांत कुमार एजेंसी, जम्मू
एजेंसी, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 03 Sep 2019 05:22 PM IST
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People feeling happy as resident of laddak union territory, People's reaction to changed situation
लेह - फोटो : अमर उजाला

पांच अगस्त को जब राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने की घोषणा के साथ लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने की घोषणा की तो यहां की जनता सड़कों पर निकलकर नाच रही थी। जश्न मना रही थी। इसमें बच्चे, युवा व बुजुर्ग, महिला और पुरुष सभी शामिल थे। इन्हीं में एक थे चेवांग डोलमा। 68 वर्षीय डोलमा यहां एक सरकारी अस्पताल से मैट्रन के तौर पर सेवानिवृत्त हुए वह कहते हैं कि लद्दाखी 70 वर्षों से इसका सपना देख रहे थे। वह अब पूरा हुआ। आखिरकार कश्मीर से अलग होकर लद्दाख एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया। वहीं नाम उजागर करने की शर्त पर एक छात्रा ने कहा कि हमें कई सरकारी कर्मचारियों की मुट्ठियां गर्म करनी पड़ती थीं।

People feeling happy as resident of laddak union territory, People's reaction to changed situation
लेह - फोटो : अमर उजाला

ऐसी भावनाएं प्रकट करने वाले डोलमा अकेले नहीं हैं। लद्दाख के लेह जिले की प्रमुख सड़कों और बाजारों में जगह-जगह आपको कपड़े के बैनर दिख जाएंगे, जिनमें स्थानीय लोगों की भावानाएं आपको दिखाई देंगी। इन पर केंद्र शासित प्रदेश बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया गया है, तथा लिखा है कि वह अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। एक बैनर में लिखा है कि लद्दाख कश्मीर से मुक्त हुआ।

 

People feeling happy as resident of laddak union territory, People's reaction to changed situation
लेह - फोटो : अमर उजाला

स्थानीय लोग कहते हैं कि जम्मू कश्मीर के साथ रहने में लद्दाख की बहुत उपेक्षा हुई। अब यहां विकास और समृद्धि दिखाई देगी क्योंकि लद्दाख की कमान अपने लोगों के हाथ में होगी। केंद्र ने 5 अगस्त को संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द करके जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त कर दिया था साथ ही जम्मू-कश्मीर  और लद्दाख को केंद्र शासित राज्यों में विभाजित कर दिया था। हालांकि यह फैसला आधिकारिक रूप से 31 अक्टूबर को लागू होगा।

 

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लेह - फोटो : अमर उजाला

केमडे गांव की रहने वाली एक छात्रा अपनी पहचान सार्वजनिक न करने की शर्त पर कहती है कि वह जम्मू विश्वद्यिालय की छात्रा है। उसे कई बार कागजी कार्रवाई के लिए श्रीनगर के चक्कर काटने पड़ते थे। वह कहती है कि लद्दाखी होने के नाते, हमें बहुत सी समस्या का सामना करना पड़ा। न केवल यात्रा के लिए लंबी दूरी बल्कि हमें कई सरकारी कर्मचारियों की मुट्ठियां गर्म करनी पड़ती थीं। अब मैं बहुत खुश हूं हमें श्रीनगर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
 

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लेह

हालांकि अधिकांश लोग खुश हैं परंतु कई लोग भविष्य को लेकर आशंकित भी हैं। लेह के एक उद्यमी स्टैंज़िन जॉर्डन (28) ने कहा कि वह फिलहाल केंद्र शासित प्रदेश बनने की चर्चाओं के बाद से बहुत उत्साहित नहीं हैं। वह कहते हैं कि मैं वास्तव में बहुत उलझन में हूं कि यूटी बनने के बाद लद्दाख का क्या होगा। अगस्त में नरोपा फैलोशिप से स्नातक करने वाले जार्डन ने कहा कि लद्दाख की पारिस्थितिकी और बुनियादी ढांचा बहुत ही नाजुक है। फिलहाल मैं यह नहीं बता सकता कि स्थानीय लोगों के लिए कितनी नौकरियां पैदा होंगी तथा हमारी संस्कृति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। लद्दाख की संस्कृति वास्तव में बहुत ही विशिष्ट संस्कृति है,और लेह शहर में लगभग सभी इमारतें, होटल और घरों में लकड़ी की अद्वितीय लद्दाखी नक्काशी दिखाई दे जाएगी।
 

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