आतंकियों को कश्मीर घाटी की ओर ले जा रहा ट्रक प्रदेश में कैसे और कब दाखिल हुआ यह एक बड़ी पहली बना हुआ है। दरअसल आतंकियों को कश्मीर ले जाने वाले इस ट्रक की मूवमेंट लखनपुर में नौ नवंबर को दर्ज हुई थी, जिसमें यह प्रदेश से बाहर सुबह साढ़े दस बजे रवाना हुआ था। सीसीटीवी फुटेज खंगालने और रिकॉर्ड जांचने के बाद भी इस ट्रक के लखनपुर के रास्ते प्रदेश में वापस लौटने का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद यह ट्रक किसी माइनर पोस्ट से वापस प्रदेश में दाखिल हुआ।
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नगरोटा एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
इससे पहले यही ट्रक एक नवंबर को सुबह आठ बजकर 51 मिनट पर लखनपुर के रास्ते प्रदेश में दाखिल हुआ था, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से अंतरराज्यीय रूटों पर प्रतिबंध के बावजूद इस ट्रक को यदि किसी माइनर पोस्ट से निकाला गया है तो इसे भी सुरक्षा में एक बड़ी चूक के रूप में देखा जा सकता है। क्योंकि कोरोना महामारी के चलते प्रदेश के अंतरराज्यीय रूटों में से मात्र अटल सेतु और लखनपुर को वाहनों के आवागमन के लिए खोला गया है।
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इसी ट्रक में छिपे थे आतंकी
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ट्रक में लगाई गई थी फर्जी नंबर प्लेट
जिस ट्रक से आतंकी कश्मीर जा रहे थे उस ट्रक का रजिस्ट्रेशन नंबर कश्मीर का ही था। साथ ही यह भी पता चला है कि यह नंबर प्लेट फर्जी थी। असलियत में यह नंबर महिंद्र की पिकअप का था। आतंकियों के नेटवर्क को खंगालने के लिए कश्मीर में कुछ जगहों पर भी कार्रवाई की गई है।
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नगरोटा एनकाउंटर
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एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बन टोल प्लाजा पर मुठभेड़ में मारे गए आतंकी जिस ट्रक से यहां तक पहुंचे थे, उस ट्रक के बारे में जानकारी ली गई। इस दौरान पता चला कि जेके 01 एएल 1055 नंबर किसी महिंद्रा पिकअप का है। ट्रक पर लगी नंबर उस ट्रक की नहीं थी।
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नगरोटा एनकाउंटर
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साथ ही यह पता चला है कि महिंद्र पिकअप श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र रंगरेट के फारूक अहमद तांत्रे के नाम पर रजिस्टर्ड है। वहीं आरटीओ की रजिस्ट्रेशन डीटेल में जिस शख्स का मोबाइल नंबर है वो भी असली मालिक का नहीं बल्कि जम्मू की एक ट्रकिंग कंपनी के अधिकारी का है।