इस समय दुनिया कोरोना से जूझ रही है। ऐसे में रमजान पर भी कोरोना का असर दिख रहा है। कश्मीर घाटी में पहले की तरह रमजान पर दिखने वाली चहल-पहल गायब है। मस्जिदों और आसपास के इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं मस्जिद के एक इमाम ने कहा कि इस पाक महीने में हम सभी सामाजिक दूरी का पालन करें। अपने घरों में ही रहकर अल्लाह की इबादत करें।
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जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन
- फोटो : बासित जरगर
जम्मू संभाग में बाड़ी ब्राह्मणा जामा मस्जिद के इमाम व खतीब मुफ्ती फारूक मोहम्मद कासमी ने कहा कि इस्लाम में रमजान माह को सबसे पाक महीना माना गया है। कुरान में भी यह कहा गया है कि अपने गुनाहों से तौबा करो, और रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करो। यह इबादत सिर्फ भूखे रहना ही नहीं है, बल्कि इस दौरान अच्छे काम करो, जरूरतमंदों की मदद करो। हदीस पाक में भी रमजान को अल्लाह की बड़ी इबादत बताया गया है।
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उन्होंने बताया कि रोजा रखने का मतलब सिर्फ खानपान छोड़ देना ही नहीं है बल्कि एक दूसरे की बुराई करना भी गलत बताया गया है। कुरान में यह बताया गया है कि रोजेदार को न तो किसी की बुराई करनी है और न ही देखनी और सुननी है। यहां तक ताकीद की गई है कि किसी को भी ऐसी कोई बात नहीं करनी है जिससे उसके दिल को ठेस पहुंचे।
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हजार रातों से बेहतर शब-ए-कद्र
रमजान माह के दौरान 25वें रोजे को शब-ए-कद्र रात होती है। इस रात को जागकर खुदा की इबादत की जाती है। इसे हजारों रात से बेहतर माना गया है।
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रोजे के बारे में बताया गया है कि रमजान माह में अगर कोई एक नेक काम करता है तो उसके बदले में अल्लाहताला उसे 70 गुना फायदा देता है। यह सिर्फ धन दौलत, खानपान या किसी वस्तु से जुड़ा नहीं है, बल्कि किसी को रास्ता बता देना, किसी की मदद करना, किसी का बिगड़ा काम बनाना आदि शामिल हैं।