मेरठ के कोल्ड स्टोर का लिंटर गिरने से मारे गए जम्मू कश्मीर के उधमपुर जिले के सातों लोगों के गांव में मातम छा गया है। जब इनके परिवार के सदस्यों को मौत के बारे में पता चला तो अपनी सुधबुध खो बैठे। इस हादसे में किसी ने अपने पिता को, किसी ने भाई को और किसी ने अपना बेटा खो दिया है। रामनगर के जोफड़ में रहने वाला बलवंत अपने दो भाई सुदेश कुमार और सूरज चंद के साथ काम करने के लिए मेरठ गया था। तीनों इससे पहले भी कई बार मेरठ में काम करने के लिए गए थे। इनको हर बार ठेकेदार जगदीश ही लेकर जाता था।
मेरठ कोल्ड स्टोर हादसा: जम्मू कश्मीर से सुबह ही काम करने को पहुंचे थे श्रमिक, दोपहर बाद घरों में छा गया मातम
शुक्रवार सुबह ही तीनों एक साथ मेरठ पहुंचे और कोल्ड स्टोर में काम शुरू कर दिया। इनको नहीं पता था कि बलवंत हादसे का शिकार होने पर अपनी जान गंवा देगा। बलवंत की तीन बेटिया हैं और अब तीनों बेटियों के सिर से पिता का साया उठा गया है। इनके गांव में जब बलवंत की मौत की सूचना पहुंची तो चीख पुकार मच गई।
बलदेव की है एक बेटी
पंचैरी तहसील के बदोता में रहने वाला बलदेव अपने पीछे एक बेटी को छोड़ गया है। इसके अलावा उसके तीन भाई और दो बहनें हैं। जिस बेटी की परवरिश के लिए बलदेव अपने घर से कई किलोमीटर दूर काम करने के लिए गया था, अब वह बेटी को नहीं देख सकेगा। वहीं बेटी को अपना पिता नहीं मिल सकेगा।
शवों को लेने जिला प्रशासन की टीम रवाना
मेरठ में कोल्ड स्टोर का लेंटर गिरने से मारे गए मजदूरों को शवों को लाने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी टीम को मेरठ के लिए रवाना कर दिया है। मेरठ में पोस्टमार्टम की औपचारिकता पूरी करने के बाद यह टीम शनिवार रात तक शवों को लेकर उधमपुर पहुंचेगी। इनका अंतिम संस्कार रविवार को होने की संभावना है। मेरठ हादसे की जानकारी शाम के समय जिला प्रशासन तक भी पहुंच गई और यूटी प्रशासन से निर्देश मिलने पर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में तीन लोगों की टीम को मेरठ के लिए रवाना कर दिया गया है। ये लोग शनिवार सुबह तक मेरठ पहुंच जाएंगे और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को पूरा करवाएंगे। इसके बाद शवों को उधमपुर और इनके ग्रामीण इलाकों में पहुंचाया जाएगा।
वीडियो काल कर जाना घायलों का हाल
मेरठ में हादसे की सूचना मिलने के बाद मजदूरों के परिवारों के होश उड़ गए। परिवार के सदस्य फोन के जरिए एक दूसरे के साथ संपर्क करने गले। फोन करके भी जब संतुष्टि नहीं हुई तो वीडियो काल कर अपने परिवार के सदस्य की हालत को देखा और जब लगा कि वह ठीक है तो राहत की सांस ली।