कश्मीर में प्रशासन ने लॉकडाउन को सख्ती से लागू करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अहम भूमिका निभा रही हैं। वहीं साइबर पुलिस ने भी अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। इस बीच श्रीनगर में पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के जवान और अधिकारी भी सड़कों पर नजर आए। वह उन इलाकों में सक्रिय दिखे, जिनमें सख्ती से लॉकडाउन का पालन करवाना बेहद जरूरी था।
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जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन
- फोटो : अमर उजाला
एसओजी के जवान लॉकडाउन को सुनिश्चित बनाने के लिए ड्रोन व अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक जवान ने बताया कि खुद को भी संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए हम भी सामाजिक दूरी का पालन करते हुए दूर से ही ऐसे इलाकों पर ड्रोन के जरिये नजर रखते हैं, जहां लोगों की मूवमेंट का अंदेशा हो। इतना ही नहीं, जब भी हमें कोई मूवमेंट दिखती है, तो हम ड्रोन पर लगे ऑडियो सिस्टम से लोगों को घर में रहने के लिए अपील करते हैं। साथ ही ड्रोन में ऐसे लोगों की मूवमेंट भी रिकॉर्ड हो जाती है, जो दिशा निर्देशों का पालन नहीं करते। बाद में उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सबूत भी रहता है।
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जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन
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कश्मीर साइबर पुलिस के इंचार्ज और एसपी (ऑपरेशन्स) ताहिर अशरफ ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान कश्मीर की साइबर पुलिस और अधिक सतर्क हो गई है। सोशल मीडिया अकाउंट्स फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप आदि पर नजर है। गलत जानकारी देने और गलत पोस्ट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभी तक कश्मीर में पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 160 के पार पहुंच गया है।
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जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन
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श्रीनगर का एक स्थानीय लड़का जो ‘मूसा कश्मीरी’ के नाम से ट्विटर अकाउंट चलाता था और आतंकियों के समर्थन में ट्वीट व कमेंट करता था, उसको साइबर पुलिस इंचार्ज एसपी ताहिर अशरफ ने अपने दफ्तर बुलाया और उसको सही परामर्श दिया गया।
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जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन
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ताहिर ने बताया कि उस लड़के ने 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। साथ ही अपने बैच में टॉपर भी रहा है। लेकिन कुछ अराजकतत्वों की बातों में आकर ऐसे पोस्ट करता रहा। पिता के साथ उसे बुलाया गया और उसे सही परामर्श दिया गया।