घाटी में महाशिवरात्रि पर सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में भीड़ लगी रही। कश्मीर पंडित समुदाय के अलावा अन्य लोग उत्साह के साथ भोले के दरबार में माथा टेकने के लिए पहुंचे। इससे दिनभर रौनक बनी रही। श्रीनगर के एतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को खास तौर से सजाया गया था। मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन भी किया गया था। डल झील के किनारे सुलेमान टेंग स्थित शंकराचार्य मंदिर में सुबह से ही भक्त जुटने लगे थे। यहां सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिली।
जेके में महाशिवरात्रि: शंकराचार्य मंदिर में कश्मीरी पंडितों ने मनाया 'हेरथ',सुरक्षाबलों के कैंपों में हवन-पूजन
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बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे। भक्तों द्वारा शिवलिंग पर दूध, फूल, आदि चढ़ाकर प्रार्थना की गई। इस मौके पर कश्मीरी समुदाय के लोगों ने भी कश्मीरी पंडितों को शुभकामनाएं देने के साथ मिठाइयां भेंट कीं। कश्मीर घाटी में धार्मिक सद्भाव के साथ महाशिवरात्रि का पर्व मनाया गया। कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों के साथ-साथ बाहर से आए लोगों ने भी पूजा पाठ में भाग लिया।
श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को बेहतरीन तरीके से सजाया गया था। मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना का दौर शाम तक चलता रहा। शंकराचार्य मंदिर में सुबह से ही भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शनों के लिए आने शुरू हो गए। भक्तों ने शिवलिंग पर दूध, फूल आदि चढ़ाकर प्रार्थना की।
शंकराचार्य मंदिर में हुए पूजा पाठ में कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों से आए पर्यटकों और सुरक्षा कर्मियों ने विशेष हवन में भाग लिया। कश्मीरी समुदाय के लोगों ने भी मिठाइयां बांटी। मंदिर के पुजारी ने बताया कि महाशिवरात्रि के मौके पर सुबह पांच बजे से पहले ही पूजा अर्चना शुरू हो गई। सबसे पहले रुद्राभिषेक हुआ।