जम्मू-कश्मीर के इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो कई ऐसे रहस्य मिलते हैं जिनके बारे में लोग शायद अनजान ही रहे हैं। यहां की धरोहरों को वो पहचान नहीं मिल पाई है, शायद जो मिलनी चाहिए थी। ऐसा ही एक स्थान है राजोरी का चिंगस। चिंगस वह स्थान है जहां अकबर के पुत्र और मुगल शासक जहांगीर उर्फ सलीम की आंतों को दफन किया गया था। जहांगीर की आंतों को चिंगस में दफन करने के पीछे एक वजह थी।
जम्मू-कश्मीर की वो जगह जहां दफन हैं जहांगीर की आंतें, जबकि बाकी शरीर लाहौर में दफनाया गया
मुगल शासक जहांगीर पहले ऐसे शख्स थे, जिनकी दो देशों में कब्र हैं। उनकी आंतें हिंदुस्तान में दफन हैं तो शरीर का बाकी हिस्सा पाकिस्तान में। राजोरी के चिंगस फोर्ट में जहांगीर की मजार है। यहां उनकी आंतों को दफन किया गया था, जबकि बाकी शरीर पाकिस्तान में लाहौर शहर के शहादरा में दफन किया गया। वहां भी उनकी मजार बनी हुई है।
चिंग पर्शियन भाषा का शब्द है, जिसका मतलब अंतड़ियां होता है। इस वजह से राजोरी के इस स्थान को चिंगस नाम दिया गया। चिंगस फोर्ट में जहांगीर की आंतें दफन होने का जिक्र ‘तुजुके जहांगीर’ नामक पुस्तक में मिलता है। फारसी भाषा में लिखी यह किताब फिलहाल जम्मू की रणवीर लाइब्रेरी में सुरक्षित है। राजोरी के राजा रहे मिर्जा जफरउल्लाह द्वारा जहांगीर पर लिखित एक अन्य किताब ‘राजगान-ए-राजोर’ में भी इस बात का जिक्र किया गया है।
जानकार बताते हैं कि चिंगस सराय मुगल शासकों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था। पाकिस्तान से कश्मीर आते-जाते वक्त यह रुकने का स्थान था। अपनी फौज सहित जहांगीर गर्मियों में कश्मीर आ जाते थे। वर्ष 1627 में कश्मीर से लौटते वक्त उनकी चिंगस में मृत्यु हो गई। इसकी सूचना उनकी पत्नी नूरजहां को दी गई।
इस पर उन्होंने अपने सलाहकारों को आदेश दिया कि मौत की खबर को गुप्त रखा जाए। साथ ही कहा कि उनकी आंतों को निकालकर वहीं दफन कर दें और बाकी शरीर पाकिस्तान के शहादरा लाहौर लाने को कहा। बताया जाता है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि शव लाहौर पहुंचने तक खराब न हो जाए। साथ ही मौत का कारण किसी को पता न चले।