{"_id":"6028c6b786675862a9763383","slug":"jammu-and-kashmir-this-retired-army-personnal-is-preparing-youth-for-army-on-the-border","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर: पाकिस्तान की सीमा पर युवाओं को सेना के लिए तैयार कर रहा है यह रिटायर फौजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर: पाकिस्तान की सीमा पर युवाओं को सेना के लिए तैयार कर रहा है यह रिटायर फौजी
Sun, 14 Feb 2021 12:14 PM IST
करिश्मा चिब
अरुण कुमार, जम्मू
अरुण कुमार, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Sun, 14 Feb 2021 12:14 PM IST
विज्ञापन
ग्राउंड में प्रशिक्षण लेते युवा
- फोटो : अमर उजाला
आए दिन पाकिस्तानी गोलाबारी से प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्र आरएस पुरा में देश की सेवा में जाने वाले युवाओं की फौज तैयार हो रही है। सेना से रिटायर कैप्टन शेर सिंह इलाके में रहने वाले युवाओं को इसके लिए प्रशिक्षण दे रहे हैं। 2011 से नि:शुल्क ट्रेनिंग दे रहे रिटायर फौजी ने दो से तीन युवाओं के साथ इसकी शुरुआत की थी। आज छह सौ से सात सौ युवा हर दिन प्रशिक्षण के लिए आते हैं। शेर सिंह युवाओं को सुरक्षाबल के लिए तैयार करते हैं।
Trending Videos
ग्राउंड में प्रशिक्षण लेने वाले युवा
- फोटो : अमर उजाला
2011 में सेना से कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए शेर सिंह कहते हैं सीमांत क्षेत्र के युवाओं में जज्बा, जनून और मेहनत करने की भावना है। यहां के युवा देश सेवा में जाना चाहते है, मैं बस उन्हें प्रेरित करता हूं। सप्ताह में छह दिन सुबह और शाम प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां युवाओं को शस्त्र बल में शामिल होने वाली हर प्रक्रिया से गुजारा जाता है। उन्हें न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक और वैचारिक रूप से मजबूत किया जाता है।
कैप्टन शेर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
सैकड़ों युवाओं का हो चुका चयन
शेर सिंह ने बताया कि इन दस वर्षों में यहां से प्रशिक्षण पाकर गए सैकड़ों युवाओं का सेना, पुलिस, बीएसएफ, सीआरपीएफ सहित अन्य शस्त्रबल में चयन हुआ है। इलाकों के अधिकांश लोग गरीब हैं। मां-बाप के पास इतना पैसा नहीं है कि वह बच्चों को उच्च शिक्षा दे पाएं। सेना के मुकाबले अन्य सरकारी नौकरियों में वेतन से लेकर अनुशासन भी नहीं है। ऐसे में युवा शस्त्रबल में शामिल होने को प्राथमिकता देते हैं।
शेर सिंह ने बताया कि इन दस वर्षों में यहां से प्रशिक्षण पाकर गए सैकड़ों युवाओं का सेना, पुलिस, बीएसएफ, सीआरपीएफ सहित अन्य शस्त्रबल में चयन हुआ है। इलाकों के अधिकांश लोग गरीब हैं। मां-बाप के पास इतना पैसा नहीं है कि वह बच्चों को उच्च शिक्षा दे पाएं। सेना के मुकाबले अन्य सरकारी नौकरियों में वेतन से लेकर अनुशासन भी नहीं है। ऐसे में युवा शस्त्रबल में शामिल होने को प्राथमिकता देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विवेक
- फोटो : अमर उजाला
मैं एक वर्ष से सर के पास प्रशिक्षण ले रहा हूं। मैं पहले खुद से तैयारी करता था, लेकिन जब आपको को कोई मार्ग दिखाता है तो आप उस दिशा में अपनी ऊर्जा लगाते हैं, जिससे परिणाम मिलने की संभावना अधिक रहती है।
-विवेक
-विवेक
विज्ञापन
सुनील
- फोटो : अमर उजाला
आर्मी में जाना मेरी पहली प्राथमिकता है। इसको लेकर में नियमित तैयारी कर रहा हूं। सर के मार्गदर्शन ने तैयारियों को दिशा दी है, जिसका मुझे लाभ मिलने की उम्मीद है।
-सुनील चौधरी
-सुनील चौधरी