जब जेलर ही कर बैठी सिक्कों की हेराफेरी, तस्वीरों में मामला
कोट भलवाल जेल जम्मू की तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट रजनी सहगल, चक्कर हवलदार रवि कुमार, मोहन लाल और सुमल कुमार के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने केस दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने कोट भलवाव जेल परिसर में मिले प्राचीन सिक्कों की हेराफेरी की। गृह विभाग से संवाद मिलने और डीजी जेल की सिफारिशों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, ताकि उक्त सिक्कों की रिकवरी हो सके। साथ ही इस मामले की सघन जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
(सभी तस्वीरें सोशल मीडिया से)
जब जेलर ही कर बैठी सिक्कों की हेराफेरी, तस्वीरों में मामला
क्राइम ब्रांच की ओर से की गई जांच के दौरान पाया गया कि सितंबर 2012 में खेती के लिए जेल के अंदर खुदाई के दौरान कैदियों को 450 से 500 सिक्कों से भरा एक मिट्टी का मटका (कुज्जा) मिला। सिक्कों को साफ किए जाने के दौरान उसमें सोने जैसी चमक देखी गई। कैदियों ने टूटा मटका और प्राचीन सिक्कों को पेपर में लपेटने के बाद हवलदार रवि कुमार और मदन लाल के सुपुर्द कर दिया। उन्होंने उक्त सामान जेल सुपरिंटेंडेंट रजनी सहगल को दे दिया। इसके बाद सभी कैदी बैरक में लौट गए।
जब जेलर ही कर बैठी सिक्कों की हेराफेरी, तस्वीरों में मामला
इसी बीच, सिक्के मिलने की खबर लीक हो गई। जेल के उच्चाधिकारियों ने नवंबर 2012 में मामले की जांच के आदेश दिए। जांच में पाया गया कि जेल सुपरिंटेंडेंट के निर्देश पर हवलदार रवि कुमार, मोहन लाल और सुमन कुमार ने कैदियों को धमकी दी कि यदि किसी ने सिक्के मिलने की सही तिथि और संख्या बताई तो उनके रिकार्ड में ‘रेड एंट्री’ कर दी जाएगी, जिससे उसकी रिहाई का रिकार्ड खराब हो जाएगा।
जब जेलर ही कर बैठी सिक्कों की हेराफेरी, तस्वीरों में मामला
कैदियों को टार्चर किया गया कि वह यह बयान दें कि सिक्के सितंबर नहीं, बल्कि दीवाली के करीब नवंबर में मिले थे। इनकी संख्या मात्र सौ थी। जांच में पता चला कि उक्त सिक्के मोहम्मद गौरी, बलवान, अलाउद्दीन खिलजी के शासन के दौरान उपयोग होते थे। सिक्के सोने और तांबे के थे। जेल सुपरिंटेंडेंट रजनी सहगल ने जान बूझकर मामले में चुप्पी साधी और अपने सीनियर अफसरों या संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को रिकवरी की सूचना नहीं दी।
जब जेलर ही कर बैठी सिक्कों की हेराफेरी, तस्वीरों में मामला
जबकि दि ट्रेजर ट्रोव एक्ट के तहत यह आवश्यक होता है। मामले की जांच शुरू होने के बाद सहगल ने बताया कि नवंबर 2012 में कुल 107 सिक्के मिले थे। आरोप है कि उन्होंने फर्जी रिकार्ड तैयार किया और उसमें रिकवरी की गलत तिथि और समय अंकित किया। साथ ही हड़बड़ी में बरामद सिक्कों को अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय के निदेशक को सौंप दिया ताकि अपनी गलतियों को छुपाया जा सके।