21 अक्तूबर का दिन भारत में हर वर्ष राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उन शहीद पुलिसकर्मियों की याद में समर्पित है, जिन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। इस वर्ष जम्मू के गुलशन ग्राउंड में इस अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
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राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस
- फोटो : निखिल मेहता
यह दिन 1959 में शहीद हुए 10 पुलिसकर्मियों की शहादत को याद करता है, जो चीन के साथ वर्तमान पूर्वी लद्दाख सीमा पर ड्यूटी के दौरान शहीद हुए थे। 'हॉट स्प्रिंग्स' नामक स्थान पर, जहां तीन पुलिस पार्टियों को क्षेत्र की खोजबीन के लिए भेजा गया था, दो पार्टियां सुरक्षित लौट आईं, लेकिन तीसरी पार्टी लापता हो गई। 21 अक्टूबर को, जब एक खोज एवं बचाव टीम को भेजा गया, तो उन्हें चीनी सेना द्वारा घेर लिया गया, जिससे 10 पुलिसकर्मी शहीद हुए और 7 अन्य घायल हुए।
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राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस
- फोटो : निखिल मेहता
इस दिन का आयोजन न केवल उन बहादुर पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पुलिस का कार्य समाज में सुरक्षा और शांति बनाए रखना है। यह व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है और समाज में व्याप्त अशांति को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने पुलिस की भूमिका और उनकी बहादुरी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में, जहां सोशल मीडिया के कारण समाचार तेजी से फैलते हैं, पुलिस बलों को भी अपनी रणनीतियों को अपडेट करना आवश्यक है।
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राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस
- फोटो : निखिल मेहता
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा हमारी पुलिस बल समाज की सुरक्षा के लिए दिन-रात काम कर रही है। हमें उनकी बहादुरी को हमेशा याद रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बढ़ते अपराध को रोकने के लिए पुलिस को और अधिक सक्षम बनाना होगा।
इस दिन हम सभी शहीद पुलिसकर्मियों की शहादत को नमन करते हैं और यह संकल्प लेते हैं कि हम उनके कार्यों का सम्मान करेंगे और समाज की सुरक्षा में सहयोग देंगे।
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- फोटो : निखिल मेहता
कार्यक्रम का समापन शहीदों की याद में एक मौन श्रद्धांजलि देकर किया गया, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने एकजुट होकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।