जम्मू-कश्मीर: एक साल बाद भी कम्युनिकेबल डिजीज अस्पतालों के लिए नहीं मिल पाई जमीन
प्रदेश में दोनों संभागों में अभी तक संक्रमित बीमारियों के लिए अलग से कोई अस्पताल नहीं है। पिछले साल कम्युनिकेबल डिजीज अस्पताल के लिए कवायद शुरू की गई। इसमें स्वास्थ्य विभाग ने मंडलायुक्त प्रशासन से 100 कनाल जमीन की मांग की, लेकिन अभी तक यह सिरे नहीं चढ़ पाई है। अभी तक संभागीय प्रशासन की ओर से नाले और खड्ड वाली ही अधिकतर भूमि दिखाई गई है।
इन अस्पतालों का शहर के बाहरी इलाकों में निर्माण करवाया जाना प्रस्तावित है। अस्पतालों का उद्देश्य संक्रमित महामारी के दौरान शहरी अस्पतालों पर लोड खत्म करके अलग से मरीजों को उचित चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाना है। ऐसे अस्पतालों में आधुनिक सुविधाओं के साथ खुद की लैब होगी, जिसमें मरीजों की रिपोर्ट के जल्द नतीजे लाकर उन्हें उचित इलाज देने पर काम किया जाएगा।
वर्तमान में कोविड संक्रमित मरीजों को स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के अस्पतालों में रखा जा रहा है। इसमें जीएमसी सहित कई एसोसिएटेड अस्पतालों को सामान्य से कोविड में तब्दील किया गया है। जीएमसी के अलावा सीडी, गांधीनगर स्थित नया जच्चा-बच्चा अस्पताल, पुराना गांधीनगर अस्पताल कोविड के तौर पर काम कर रहा है। अगर अलग से कम्युनिकेबल डिजीज अस्पताल होता तो ये सभी अस्पताल सामान्य तौर पर काम कर सकते हैं।
जमीन की तलाश चल रही है
स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्तीय आयुक्त अटल डुल्लू ने बताया कि कम्युनिकेबल डिजीज अस्पताल के प्रोजेक्ट को आत्मनिर्भर भारत प्रोग्राम में शामिल किया गया है। इसी प्रोग्राम के तहत इसका वित्त पोषण किया जाएगा। इन अस्पतालों के लिए संभागीय स्तर पर भूमि की तलाश की जा रही है।