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J&K: शहीद जवान के शव को राखी बांध बहन बोली, भैया बिना बात किए क्यों चले गए

Mon, 27 Aug 2018 12:13 AM IST
आशीष कपूर, अमर उजाला, जम्मू
आशीष कपूर, अमर उजाला, जम्मू Updated Mon, 27 Aug 2018 12:13 AM IST
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indian army martyr jawan body reaches home on raksha bandhan in kathua jammu kashmir
जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए राइफलमैन निहाल गुरूंग का पार्थिव शरीर उनके घर कठुआ के बसोहली में उसके गांव घगरोड़ पहुंचा। रक्षाबंधन के दिन उनका पार्थिक शरीर घर पहुंचने से उनकी बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। शहीद निहाल की छोटी चचेरी बहन बिपाशा गुरुंग हर साल उसे राखी बांधती थी। उसे मलाल है कि इस बार उसके भाई ने उससे बात तक नहीं की और न ही कुछ देकर गया। 


मासूम बिपाशा ने रोते हुए अपने दिल का दर्द बयां किया। बिपाशा ने कहा कि भैया तो आए, राखी भी बांधी, लेकिन भैया ने मुझसे बात तक नहीं की और न ही मुझे कुछ दिया। उसने कहा कि भाई से खूब झगड़ती भी थी। गुस्सा होती तो भाई मना भी लेता था, लेकिन अब कौन मनाएगा। 

निहाल की बड़ी बहन ने कहा कि उन्हें गर्व है भाई ने शहादत का जाम पिया है। दुख इस बात का है कि आज भाई-बहन के अटूट रिश्ते का दिन है। वह चुपचाप आया और चला गया। उन्होंने बताया कि दो-तीन महीने पहले जब निहाल घर आया तो बहन ने सलाह दी थी कि संभल कर सीमा पर आगे न जाया करे। इसके जवाब में निहाल ने कहा था कि वर्दी पहनी है तो अपना फर्ज निभाना ही होगा। निहाल की बहन ने कहा कि वह देश के लिए अपना फर्ज निभा गया है।
indian army martyr jawan body reaches home on raksha bandhan in kathua jammu kashmir
निहाल के पार्थिव शरीर की एक झलक पाने के लिए गांव की हर गली से लोग रोते हुए उसके घर की तरफ भागे। बाद में शहीद को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस बीच श्मशान घाट भारत माता के जयघोष से गूंज उठा। निहाल की सगाई हो चुकी थी। इसलिए उसे अंतिम विदाई देने के लिए उसकी मंगेतर भी पहुंची थी। उसका रो-रो कर बुरा हाल था।
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रविवार को जब निहाल गुरूंग का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव घगरोड़ पहुंचा तो बसोहली के लाल को अंतिम विदाई देने के लिए आसपास के गांव से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। स्थानीय विधायक चौधरी लाल सिंह और पूर्व विधायक जगदीश राज सपोलिया भी शहीद को श्रद्घासुमन अर्पित करने पहुंचे। इससे पहले तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर सैन्य वाहन से जैसे ही गांव में पहुंचे पूरे गांव में मातम छा गया। 
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केरन सेक्टर में शनिवार को माइन ब्लास्ट की चपेट में आने से निहाल गुरूंग शहीद हो गए थे। रविवार को दोपहर दो बजे सेना की टुकड़ी निहाल के पार्थिक शरीर को लेकर घगरोड़ पहुंची। तिरंगे में लिपटा शव जैसे ही घर पहुंचा परिवार के लोग बिलख-बिलख कर रोने लगे।
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महज 23 वर्ष के निहाल का पार्थिव शरीर देखकर माता-पिता और बूढ़े दादा-दादी सुधबुध खो बैठे। बेटे के सिर सेहरा बांधने का उनका सपना अधूरा ही रह गया। निहाल की मंगेतर भी उसे अंतिम विदाई देने पहुंची। उसका भी रो-रो कर बुरा हाल था। घर से जैसे ही शहीद को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाने लगा, पूरे गांव में निहाल अमर रहे और भारत माता का जयघोष गूंज उठा। घगरोड़ के श्मशान घाट में निहाल का अंतिम संस्कार किया गया, जहां सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी।  
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