कश्मीर की सात ज़ियारतें, जहां पूरी होती है मन की मुराद
बाबा ऋषि
ये बाबा कयामुद्दीन की दरगाह है। वे बाबा जैन शाह के शिष्य थे। श्रीनगर के जकूरा इलाके के करीब स्थित चांद नाऊ गांव के रहने वाले बाबा कयामुद्दीन की दरगाह पर लोग बच्चों का पहला मुंडन करवाने जाते हैं।
कश्मीर की सात ज़ियारतें, जहां पूरी होती है मन की मुराद
हजरत बल
डल झील के किनारे बने हजरत बल में कहा जाता है कि पैगम्बर मोहम्मद साहेब का बाल रखा हुआ है। इसकी वजह से यह दुनिया भर में जाना जाता है। इसे हज़रत बल के अलावा भी कई नामों से जाना जाता है।
कश्मीर की सात ज़ियारतें, जहां पूरी होती है मन की मुराद
ख़ानकाह-ए-मौला
ये दरगाह ईरान के हमदान निवासी आध्यात्मिक गुरू मीर सैयद अली हमदानी यानी अमीर कबीर के शिष्यों ने स्थापित की। इन्हीं के शिष्यों ने घाटी में इस्लाम के प्रसार में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। इन्हीं के 700 शिष्य पेपरमैशी, लकड़ी पर नक़्क़ाशी का हुनर लेकर आए थे।
कश्मीर की सात ज़ियारतें, जहां पूरी होती है मन की मुराद
नक्शबंद साहब
ये धर्मगुरू मध्य एशिया निवासी थे और उनका नाम शेख बहाउद्दीन नक्शबंदी था। 14वीं शताब्दी में जन्मे शेख बहाउद्दीन के शिष्यों ने इसे स्थापित किया और यह दरगाह कश्मीर की सबसे पुरानी सांस्कृतिक धरोहरों में एक है।
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मकदूम साहब
ये कश्मीरी मूल के शीर्ष धर्म गुरुओं में एक सुल्तान-उल-आरिफीन शेख हम्जा मकदूम की दरगाह है। इनका जन्म बारामूला के तजुर गांव में हुआ था। चक राजवंश के दौरान काम कर रहे शेख हम्जा मकदूम ने ऋषि संप्रदाय का भी नेतृत्व किया जिसे ख्वाजा ओवैस कर्ने ने शुरू किया था।