दिन चढ़ने के साथ बढ़ता शोरगुल। सीटियों की गूंज। तिरंगों के साथ देशभक्ति का जयघोष। उड़ते गुलाल के साथ उत्साह और जोश। संडे की छुट्टी के साथ होली पर शहर में ऐसा ही नजारा था।
सुबह से ही गली मोहल्लों में होली का शोरगुल शुरू हो गया था। सीटियों की गूंज के साथ युवाओं की टोलियां आगे बढ़ती रहीं, जो सामने आया उसे रंगों में रंग दिया गया। हालांकि, साफ मौसम के बावजूद ठंड का भी खूब अहसास हो रहा था। लेकिन होली के शौकीन ने छतों से पानी की बौछारें करना नहीं छोड़ीं।
चौक-चौराहों पर डीजे की धुनों पर रंगों के साथ जमकर होली का जश्न मनाया गया। रंग बरसे भीगे चुनरवाली... अंग से अंग मिलाना... और भोजपुरी होली के गीतों पर युवा झूमते रहे। बच्चों में होली को लेकर ज्यादा उत्साह रहा। होली मनाने के लिए बच्चों ने ढेर सारी तैयारी करके रखी थीं। दोस्तों, रिश्तेदारों और अपनों को रंग लगाने के साथ मुंह मीठा करवाकर होली की बधाई दी गई।
रंगों में पारंपरिक रंगों के साथ स्प्रे के रंगों का जमकर प्रयोग हुआ। इस बार हर्बल रंगों को ज्यादा तवज्जो दी गई। मोटरसाइकिलों पर एक हाथ में गुब्बारे और दूसरे हाथ में रंग पकड़े युवाओं का जोश देखते ही बना।
युवकों के साथ युवतियों पर भी होली का रंग खूब चढ़ा। कई टोलियों में युवतियां शामिल होकर होली का जश्न मनाती दिखीं। घरों में भी परिवार के सदस्यों के साथ युवतियों और महिलाओं ने खूब होली खेली। शहर के विभिन्न होस्टलों में भी होली का नशा छाया रहा।