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PIX: इस ऐतिहासिक धरोहर से अनजान है दुनिया

Thu, 19 Feb 2015 02:15 PM IST
Updated Thu, 19 Feb 2015 02:15 PM IST
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PIX: इस ऐतिहासिक धरोहर से अनजान है दु‌निया

historical ram temple at sumwan in jammu kathua

श्रीराम जन्म के बाद खुशियों से झूमती अयोध्या नगरी हो या फिर वनवास काल के किस्से और रावण के साथ वानर सेना का युद्ध। एक से बढ़कर एक मुंह बोलते दृश्यों की श्रृंखला दर्शाती सुमवां स्थित ऐतिहासिक राम मंदिर की वॉल पेंटिंग दुर्लभ और अद्भुत होने के बावजूद गुमनामी झेल रही है। एक सदी से भी अधिक पुरानी धरोहर जिला मुख्यालय से कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही है। इसके बावजूद ऐतिहासिक स्थापत्य पर विरली चित्रकला की धरोहर सरकारी नजर-ए-इनायत की बाट जोह रही है। सदियों बाद भी रंगों में वही चमक और कूची का मुंह बोलता हुनर हर देखने वाले को भौचक करता है। बेहद दिलचस्प है कि मंदिर की दीवारों पर एक तरफ रामायण और महाभारत कालीन दृश्यों की पूरी शृंखला को दीवारों पर बखूबी उकेरा गया है। हालांकि इस महान वाल पेंटिंग के संरक्षण के लिए कद्रदान न मिलने से ये मंदिर की दीवारों की रौनक बढ़ाने तक ही सीमित हैं।



(द्वारा- ओमपाल संब्याल)

PIX: इस ऐतिहासिक धरोहर से अनजान है दु‌निया

historical ram temple at sumwan in jammu kathua

मुसाफिरों के लिए बनाई थी सराय

जम्मू-पठानकोट रूट पर आवाजाही करने के लिए पहले ओल्ड सांबा-कठुआ रोड का ही विकल्प था। सुमवां गांव इसी सड़क से सटा हुआ है। ग्रामीण बताते हैं कि पंजाब से जम्मू की तरफ जाते समय सुमवां गांव चूंकि उज्ज दरिया से पहले पड़ता है। इसके अलावा बड़े बड़े जमींदारों का भी सुमवां में आना-जाना लगा रहता था। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर और सराय का निर्माण किया गया, ताकि मुसाफिरों को रात में ठहरने के लिए ठिकाना मिल जाए। मंदिर के मुख्यद्वार पर लिखे अक्षरों के अनुसार मंदिर का निर्माण विक्रमी संवत 1957 में शुरू हुआ, जिसे विक्रमी संवत 1962 में अंजाम तक पहुंचाया गया।

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historical ram temple at sumwan in jammu kathua

पेंटिंग्स का दुर्लभ फ्यूजन

विश्वस्थली संस्था के सदस्य शिव पाधा बताते हैं कि सुमवां राम मंदिर की दीवारों पर की गई पेंटिंग दुर्लभ श्रेणी की हैं। रंगों की चमक और चित्रकला की शैली इसे कई मायने में खास बनाती है। यह विश्व प्रसिद्ध बसोहली चित्रकला सहित विभिन्न कलाओं का मिश्रण है। इसमें बसोहली के अलावा कांगड़ा, गुलेर, चंबा और राजस्थानी चित्रकला की झलक साफ दिखाई देती है। इसे दुर्लभ फ्यूजन कहा जा सकता है। वॉल पेंटिंग श्रेणी की बात करें, तो यह म्यूरल पेटिंग है, जिसे भीतरी दीवारों पर किया जाता है।

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जैलदार फूला ने करवाया था निर्माण

सुमवां गांव में स्थित श्री राम मंदिर परिसर दो भागों में बंटा हुआ है। प्रवेशद्वार के हिस्से में सराय मौजूद है तो दूसरा भाग श्रीराम मंदिर के ढांचे का है। प्रवेशद्वार वाला हिस्सा दो मंजिला है, जिसमें सराय हुआ करती थी। आज भी झरोखे, अलग-अलग कमरे मौजूद हैं। रखरखाव नहीं होने की वजह से यह बुरी तरह से जर्जर है। यहां तक कि अब इस इमारत के दूसरे माले पर जाना भी एक तरह से वर्जित हो गया है। दूसरे भाग में मंदिर हैं जिसकी दीवारों पर वॉल पेटिंग और केंद्र में मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के सरकारी संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे लोकेश्वर सिंह ने बताया कि मंदिर के मुख्यद्वार पर दी गई जानकारी के अनुसार इसका निर्माण जैलदार फूला ने करवाया था जिसे जैलदार कान सिंह ने संकल्प और मंदिर स्थापना उपरांत बुल्लो पंडित के सुपुर्द कर दिया। गांव के सरपंच अशोक कुमार ने सरकार से इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की मांग की है।

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सुमवां राम मंदिर का इमारती ढांचा और वॉल पेंटिंग्स दोनों ही ऐतिहासिक धरोहर हैं। लखनपुर सरथल डेवलपमेंट अथॉरिटी इसे नए विकास प्रस्ताव में शामिल करने जा रही है। सुमवां की दुर्लभ वॉल पेंटिंग्स को इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज के ध्यान में लाया जाएगा, ताकि संरक्षण कार्य को बेहतर तरीके से किया जा सके।
-डॉ भारत भूषण, सीईओ एलएसडीए

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