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महाशिवरात्रि जिसे जम्मू-कश्मीर में कहते हैं 'हेरथ': मुस्लिम निभाते हैं ये रस्म, अद्भुत है पूजनविधि

Thu, 11 Mar 2021 10:31 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 11 Mar 2021 10:31 AM IST
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Herath festival of Kashmiri Pandits is called Mahashivratri in Shankaracharya Temple Srinagar
महाशिवरात्रि पर कश्मीर घाटी में खास तैयारियां - फोटो : बासित जरगर

हर-हर महादेव, बम-बम भोले, शंकर संकट हरना जैसे जयकारों की जम्मू-कश्मीर में धूम है। श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को भी सजाया गया है। महाशिवरात्रि पर कश्मीर घाटी में खास तैयारियां की गई हैं। कश्मीरी पंडितों का यह सबसे बड़ा त्योहार होता है। देश के अन्य हिस्सों की अपेक्षा इसे यहां ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। कश्मीरी पंडित इसे 'हेरथ' के रूप में मनाते हैं। हेरथ शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका हिंदी अर्थ हररात्रि या शिवरात्रि होता है।

Herath festival of Kashmiri Pandits is called Mahashivratri in Shankaracharya Temple Srinagar
महाशिवरात्रि पर कश्मीर घाटी में खास तैयारियां - फोटो : बासित जरगर
हेरथ को कश्मीरी संस्कृति के आंतरिक और सकारात्मक मूल्यों को संरक्षित रखने का पर्व भी माना जाता है। इसके साथ ही यह लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बता दें कि कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि पर भगवान शिव सहित उनके परिवार की स्थापना घरों में करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से वटुकनाथ घरों में मेहमान बनकर रहते हैं। करीब एक महीने पहले से इसे मनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
Herath festival of Kashmiri Pandits is called Mahashivratri in Shankaracharya Temple Srinagar
महाशिवरात्रि पर कश्मीर घाटी में खास तैयारियां - फोटो : बासित जरगर
खास बातें

इस त्योहार के दिन पूजन में प्रयोग में लाए जाने वाले बर्तनों को प्रतीकों के रूप में प्रयोग किया जाता है। उपलब्धता के अनुरूप कई घरों में पुराने समय के पीतल के बर्तनों को प्रयोग में लाते हैं। इस पूजन व घरों में बनने वाले व्यंजनों में कमल ककड़ी और गांठगोभी काफी प्रमुख होती है। जम्मू-कश्मीर में इसे मोंजी और नदरू के नाम से जाना जाता है।

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Herath festival of Kashmiri Pandits is called Mahashivratri in Shankaracharya Temple Srinagar
महाशिवरात्रि पर कश्मीर घाटी में खास तैयारियां - फोटो : बासित जरगर

महाशिवरात्रि पर आज मुस्लिम समुदाय के लोग सलाम की रस्म निभाएंगे। इस रस्म के तहत शिवरात्रि मना रहे कश्मीरी पंडितों को समुदाय के लोग घर जाकर मुबारकबाद देते हैं। तीन दशक से अधिक समय से विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि पर सभी परंपराएं निभा रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों की इस पर्व में शिरकत कश्मीरियत का पैगाम भी देती है।

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Herath festival of Kashmiri Pandits is called Mahashivratri in Shankaracharya Temple Srinagar
महाशिवरात्रि पर कश्मीर घाटी में खास तैयारियां - फोटो : बासित जरगर

कश्मीरी पंडितों का कहना है कि अब भी यह परंपरा जारी है, यही कश्मीरियत और इंसानियत की खूबसूरती है। शिवरात्रि पर वे भगवान भैरव की भी पूजा करते हैं। भगवान भैरव को मांस और मछली का भोग लगाने की परंपरा है, जिसे वह निभा रहे हैं। रीति के अनुसार शाकाहारी भोग भी लगाए जाते हैं। इसमें पांच-छह प्रकार की सब्जियां होती हैं। रात में पूजा अर्चना करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।



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