हर-हर महादेव, बम-बम भोले, शंकर संकट हरना जैसे जयकारों की जम्मू-कश्मीर में धूम है। श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को भी सजाया गया है। महाशिवरात्रि पर कश्मीर घाटी में खास तैयारियां की गई हैं। कश्मीरी पंडितों का यह सबसे बड़ा त्योहार होता है। देश के अन्य हिस्सों की अपेक्षा इसे यहां ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। कश्मीरी पंडित इसे 'हेरथ' के रूप में मनाते हैं। हेरथ शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका हिंदी अर्थ हररात्रि या शिवरात्रि होता है।
महाशिवरात्रि जिसे जम्मू-कश्मीर में कहते हैं 'हेरथ': मुस्लिम निभाते हैं ये रस्म, अद्भुत है पूजनविधि
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इस त्योहार के दिन पूजन में प्रयोग में लाए जाने वाले बर्तनों को प्रतीकों के रूप में प्रयोग किया जाता है। उपलब्धता के अनुरूप कई घरों में पुराने समय के पीतल के बर्तनों को प्रयोग में लाते हैं। इस पूजन व घरों में बनने वाले व्यंजनों में कमल ककड़ी और गांठगोभी काफी प्रमुख होती है। जम्मू-कश्मीर में इसे मोंजी और नदरू के नाम से जाना जाता है।
महाशिवरात्रि पर आज मुस्लिम समुदाय के लोग सलाम की रस्म निभाएंगे। इस रस्म के तहत शिवरात्रि मना रहे कश्मीरी पंडितों को समुदाय के लोग घर जाकर मुबारकबाद देते हैं। तीन दशक से अधिक समय से विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि पर सभी परंपराएं निभा रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों की इस पर्व में शिरकत कश्मीरियत का पैगाम भी देती है।
कश्मीरी पंडितों का कहना है कि अब भी यह परंपरा जारी है, यही कश्मीरियत और इंसानियत की खूबसूरती है। शिवरात्रि पर वे भगवान भैरव की भी पूजा करते हैं। भगवान भैरव को मांस और मछली का भोग लगाने की परंपरा है, जिसे वह निभा रहे हैं। रीति के अनुसार शाकाहारी भोग भी लगाए जाते हैं। इसमें पांच-छह प्रकार की सब्जियां होती हैं। रात में पूजा अर्चना करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।