दो सितंबर को गणेश चतुर्थी है। इसके लिए जम्मू शहर के बाजारों में गणपति बप्पा की मूर्तियां सजने लगी हैं। मिट्टी को मूर्ति का आकार देता यह बच्चा सुर्खियों में है। लोग इसकी कारीगरी और कौशल के कायल हैं। गणेश चतुर्थी की तैयारियों को लेकर बाजार भी सज गए हैं।
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मिट्टी को मूर्ति का आकार देता यह बच्चा
- फोटो : अमर उजाला
इन मूर्तियों के अस्थाई विक्रेता बाजारों से लेकर सड़क किनारे मूर्तिकारों ने अपनी दुकानें सजा ली हैं।
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मिट्टी को मूर्ति का आकार देता कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
मूर्तिकार मूर्तियों को आकर्षक रंगों से रंग रहे हैं। बाजारों में छोटे- बड़े और मध्यम साइज के गणपति की मूर्तियां मिल रही हैं।
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मिट्टी को मूर्ति का आकार देता कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
शहर के बख्शीनगर इलाके में पहुंचे कारीगर गणपति की मूर्तियों को तैयार कर रहे हैं।
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गणेश चतुर्थी के लिए तैयार की गई मूर्ति
- फोटो : अमर उजाला
इन कारीगरों ने बताया कि जैसे -जैसे त्योहार नजदीक आएगा मूर्तियों की मांग बढ़ेगी। बता दें कि ज्योतिषशास्त्र में अश्विनी आदि सभी नक्षत्रों के अनुसार देवगण, मनुष्यगण और राक्षसगण इन तीनों गणों के ईश गणेश ही हैं। 'ग' ज्ञानार्थवाचक और 'ण' निर्वाणवाचक है 'ईश' अधिपति हैं। कहने का तात्पर्य यह कि ज्ञान-निर्वाणवाचक गण के ईश गणेश ही परब्रह्म हैं। योग-शास्त्रीय साधना में शरीर में मेरुदंड के मध्य जो सुषुम्ना नाड़ी हैं, वह ब्रह्मरंध्र में प्रवेश करके मष्तिष्क के नाड़ी समूह से मिल जाती है, इसका आरम्भ मूलाधार चक्र ही है। इसी 'मूलाधार चक्र' को गणेश स्थान कहते हैं।