कोरोना की दूसरी लहर में अपने पिता को खो चुके जम्मू शहर में शिव नगर तालाब तिल्लो निवासी अजीत सिंह ने फादर्स-डे पर जरूरतमंदों की मदद करके अपने पिता को श्रद्धांजलि दी। वह बताते हैं कि उनके पिता दिव्यांग थे। इसके बावजूद उसे और भाई को एक हाथ से साइकिल चलाकर स्कूल छोड़ने और लेने जाते थे। बचपन में दोनों भाइयों को साइकिल भी सिखाई।
फादर्स-डे पर भारी कोरोना के जख्म: पढ़िए महामारी की दूसरी लहर में पिता को खो चुके बच्चों का दर्द
उन्होंने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करके हम इस बीमारी से बच सके हैं। अस्पतालों के प्रति आम लोगों के विश्वास को बढ़ाया जाए। खासतौर पर कोरोना वार्डों में वरिष्ठ डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित बनाई जाए, ताकि अधिक लोगों को बचाया जा सके।
चिनैनी में सत्यालता बरमीन के रहने वाले विशाल सिंह कोरोना काल में अपने पिता पुरुषोत्तम सिंह को खो चुके हैं। विशाल कहते हैं पिता उनके सबसे अच्छे दोस्त भी थे। फादर्स-डे मनाने की परंपरा तो नहीं रही है लेकिन वे हर साल इस दिन पर पिता को शुभकामनाएं और बधाई संदेश जरूर देते थे। विशाल ने बताया कि बीते वर्ष फादर्स-डे पर पिता के साथ कई फोटो खिंचवाईं थीं। महामारी ने पिता को उनसे छीन लिया है। विशाल ने कहा कि पिता उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा थे। वे पिता की कमी को हर रोज महसूस करते हैं लेकिन इस बार पितृ दिवस पर उनकी कमी बहुत खल रही है।
हीरानगर के दियाला चक में जगन्नाथ सुंदन को जब इकलौता बेटा विशाल पांव छूकर पितृ दिवस की बधाई देता तो उनके लिए यह पल सबसे खास बन जाता। कोरोना काल ने विशाल को हमेशा के लिए उनसे छीन लिया। जगन्नाथ सुंदन कहते हैं कि बच्चे जब ऐसे मौकों पर अभिभावकों को बधाई व शुभकामना संदेश देकर आशीर्वाद लेते हैं तो मां-बाप सब कुछ उन पर वार देते हैं। कोरोना महामारी में बेटे को खो देने से पितृ दिवस की खुशियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं।
दोमाना में मढ़ क्षेत्र के कल्याणपुर गांव के रहने वाले रोहित और खुशी शर्मा ने बताया कि बीते साल फादर्स-डे पर उन्होंने पूरा दिन पिता (राजकुमार) के साथ बिताया था। पिता ने उन्हें खाने-पीने की चीजें भी लाकर दीं। खुशी ने बताया कि पिछली बार वह पिता की गोद में सोई थी। इस बार उनके पिता तो साथ नहीं, लेकिन उनकी यादें हमेशा साथ रहेंगी। फादर्स-डे पर उनको बीते साल पिता के साथ बिताए पल याद आएंगे। वे उन्हीं यादों के साथ पिता की फोटो को देखकर यह दिन मनाएगी।