जम्मू संभाग के डोडा में हुए सड़क हादसे में 12 लोगों को जान नहीं गंवानी पड़ती अगर मेटाडोर के चालक ने यात्रियों की बात सुन ली होती। यात्रियों ने बार-बार चालक से कहा कि वह धीरे चले, लेकिन उसने नहीं सुनीं। वाहन की स्पीड काफी थी। चालक ने ब्रेक लगानी चाही, लेकिन नियंत्रण खो बैठा और हादसा हो गया। जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई और 14 लोग घायल हुए। शवों और तड़पते घायलों को देखकर इलाके के लोग सिहर उठे।
मेडिकल कालेज अस्पताल जम्मू पहुंचे यात्रियों के साथ आए कुछ लोगों ने हादसे के बारे जानकारी दी। घायल रमेश कुमार के साथ आए रविकांत ने बताया कि वह हादसे के कुछ देर बाद वहां पहुंचे थे। चालक तेज गति में वाहन चला रहा था। कई बार कहने के बावजूद स्पीड कम नहीं की। मोड़ पर उसने जब ब्रेक लगानी चाही, तो ब्रेक नहीं लगी और मेटाडोर खाई में जा गिरी। इस हादसे में अभी तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है, 14 लोगों का इलाज चल रहा है। घायलों के सिर और गर्दन पर अधिक चोट आई है। इनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
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डोडा सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
घायलों के अस्पताल पहुंचते ही डाक्टरों का अमला इनके उपचार में जुट गया। सभी घायलों की गर्दन और सिर में चोटें हैं। गर्दन को बेल्ट से बांधा गया है। कई के शरीर के अन्य हिस्सों में भी गहरी चोटें आईं हैं। अस्पताल पहुंचते ही तमाम डॉक्टर और स्टाफ इनके उपचार में जुट गया। इस बीच अफरा तफरी का माहौल रहा।
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डोडा सड़क हादसा
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डोडा, किश्तवाड़ और रामबन यह तीनों जिले चिनाब वैली के अधीन आते हैं। यदि पिछले पांच से छह साल का आंकड़ा लें, तो साफ दिखता है कि बड़े हादसों की यह प्रमुख डेस्टीनेशन है। हर साल सड़क हादसे में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है।
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डोडा सड़क हादसा
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दो साल पहले 2 जुलाई 2019 को किश्तवाड़ में एक बस चिनाब में गिर गई थी। यह बस भी ओवरलोड थी। उसमें 50 से ज्यादा यात्री थे। 35 लोगों की मौत हो गई थी।
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डोडा सड़क हादसा
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2 जुलाई 2021 को एक सूमो रामबन में चिनाब में गिर गई और इसमें 5 की मौत हो गई। 2013 से लेकर अब तक चिनाब घाटी में 1700 से ज्यादा रोड एक्सीडेंट हो चुके हैं।