जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं कोरोना वायरस को मात देने और लोगों की मदद करने में सुरक्षाबल जुटे हुए हैं। आज यानी कि गुरुवार को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में सीआरपीएफ की 132वीं बटालियन ने लोगों को राशन मुहैया कराया। इस दौरान मौजूद अधिकारियों ने लोगों से कहा कि वो सरकारी आदेशों का पालन करें। लॉकडाउन के दौरान घरों से बाहर न निकलें।
तस्वीरेंः कोई भूखा न रहे इसलिए सीआरपीएफ ने संभाला मोर्चा, श्रीनगर में जरूरतमंदों को मुहैया कराया राशन
इससे पहले बुधवार को सीआरपीएफ की ‘मददगार’ हेल्पलाइन ने एक युवक को उसके बीमार पिता से मुश्किल घड़ी में मुलाकात कराई थी। जम्मू-कश्मीर के राजोरी का मूल निवासी आरिफ मुंबई में चौकीदारी करता है। लॉकडाउन के बीच उसके 60 वर्षीय पिता वजीर हुसैन को ब्रेन हैमरेज हो गया था। आरिफ ने इस घड़ी में पिता से मिलने के लिए किसी से साइकिल मांगी मुंबई से जम्मू के लिए चल पड़ा।
सीआरपीएफ की कश्मीर आधारित मददगार हेल्पलाइन को इसका सूचना मिली तो सीआरपीएफ ने पिता-पुत्र की मदद के प्रयास शुरू कर दिए। राजोरी से वजीर हुसैन को एयरलिफ्ट किया गया जबकि आरिफ को वड़ोदरा में खोज निकाला गया।
सीआरपीएफ ने अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए आरिफ को राजस्थान के जोधपुर और लुधियाना के रास्ते ट्रक से पंजाब पहुंचाया। वहीं इसी दौरान उसके पिता वजीर हुसैन को जम्मू से चंडीगढ़ पीजीआई शिफ्ट कर दिया गया। आखिरकार पिता और पुत्र की सोमवार को मुलाकात हो गई। सीआरपीएफ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर आरिफ की उसके पिता से मुलाकात की खबर साझा की है।
सीआरपीएफ जम्मू-कश्मीर जोन के विशेष महानिदेशक जुल्फिकार हसन ने बताया कि जैसे ही आरिफ का पता चला तो उसे वडोदरा में रुकने को कहा गया। उसके पिता को मददगार हेल्पलाइन के जरिए ख्याल रखने का भरोसा दिया गया। इसके बावजूद आरिफ ने इस घड़ी में पिता के साथ रहने की जिद नहीं छोड़ी। रविवार को वजीर हुसैन के पीजीआई में टेस्ट करवाए गए। सोमवार को आरिफ की पिता से मुलाकात करवाई गई।