कोरोना काल में एक समय वह भी आया, जब परिवार ने संक्रमित मरीज का शव स्वीकार करने से मना कर दिया या फिर परिवार के अन्य लोगों के क्वारंटीन होने से शव को दफनाने वाला कोई नहीं था। लोग भी डर के मारे जनाजे में नहीं पहुंचते थे। इस विकट घड़ी में श्रीनगर के एंबुलेंस चालक जमील अहमद डिगू मानवता की मिसाल बने। उन्होंने न सिर्फ शवों को कब्रिस्तान तक पहुंचाया बल्कि दफन करने के साथ नमाज-ए-जनाजा भी पढ़ा, जबकि उनकी ड्यूटी सिर्फ शव को कब्रिस्तान पहुंचाने की ही थी। पिछले साल करीब चार से पांच माह तक वह अपनी जान की परवाह किए बिना सेवा में जुटे रहे। श्रीनगर जिले में अभी तक कोरोना से जितनी भी मौतें हुई हैं, सभी को अस्पताल से कब्रिस्तान ले जाने और दफनाने का काम जमील ने ही किया है।
जमील के जमीर को सलाम: मौतों के उस खौफनाक मंजर में मसीहा बनकर आता था ये इंसान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Tue, 23 Mar 2021 04:40 PM IST
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