जम्मू की नरवाल सब्जी मंडी में बिक्री न होने से रोजाना हजारों मीट्रिक टन सब्जियां खराब हो जा रही हैं। कोरोना कर्फ्यू के कारण दुकानें खुलने का समय सीमित कर दिया गया है, इससे दुकानदार और रेहड़ी वाले मंडी से ज्यादा सब्जी नहीं खरीद रहे। इससे मंडी में ही सब्जियां सड़ रही हैं।
आढ़तियों के अनुसार मंडी में हर रोज किसानों से खरीदी गई सब्जी में से आधी ही बिक रही है। ऐसे में हर रोज 50 फीसदी नुकसान हो रहा है। रेहड़ी वाले और दुकानदार मंडी से कम ही माल उठा रहे हैं, इससे आढ़तियों को घाटा उठाना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि सब्जी की दुकानें खोलने का समय बढ़ाया जाए, ताकि घाटा पूरा हो सकेगा। वहीं सब्जी उत्पादकों की सब्जियां भी नहीं बिक पा रही हैं। मंडी में दाम कम मिल रहे हैं। सब्जी मंडी नरवाल के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने कहा कि खरीदी गई सब्जियों में से आधी ही बिक पा रही हैं। नुकसान बढ़ता जा रहा है।
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रोजाना हजारों मीट्रिक टन सब्जियां खराब हो जा रही हैं
- फोटो : अमर उजाला
प्रशासन को दुकानें खोलने का समय बढ़ाना चाहिए। ऐसे ही घाटा होता रहा तो फिर मंडी खोलने का क्या फायदा। इस बारे में प्रशासन को अवगत करवाया गया है। कोरोना कर्फ्यू के बीच प्रदेश के 14 लाख से ज्यादा सब्जी उत्पादकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। मशरूम, आलू सहित अन्य सब्जियां अप्रैल में तैयार हो चुकी हैं, लेकिन मंडियों में दाम न मिलने से बिजाई-खाद के खर्च के अलावा मेहनत भी नहीं निकल पा रही। इस साल अब तक सब्जी उत्पादकों को करीब 10 करोड़ रुपये नुकसान उठाना पड़ा है।
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रोजाना हजारों मीट्रिक टन सब्जियां खराब हो जा रही हैं
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बीते साल भी 30 करोड़ रुपये के आसपास नुकसान हुआ था। मौजूदा समय में तैयार मशरूम बेचने के लिए मंडी नहीं मिल पा रही। मंडियों में बेचा भी गया तो उम्मीद से कम दाम मिल रहे हैं। अब तैयार हो चुकी भिंडी, घिया, शिमला मिर्च, आलू, पालक और अन्य फसलों को भी लोकल मंडियां नहीं उठा रहीं। इससे उत्पादकों को नुकसान हो रहा है।
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रोजाना हजारों मीट्रिक टन सब्जियां खराब हो जा रही हैं
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सब्जी मंडी नरवाल और श्रीनगर के अलावा दूसरी जगह सीधे तौर पर सब्जी नहीं खरीदी जा रही। हालांकि कृषि विभाग के माध्यम से सहायता पहुंचाई जा रही है। किसानों का सीधा संपर्क सीआरपीएफ, सेना और बीएसएफ से भी करवाया जा रहा है। सेना को मशरूम पहुंचाने में यातायात की दिक्कत आ रही थी। ऐसे में विभाग अपने वाहनों में कठुआ, जम्मू, सांबा समेत अन्य जिलों में मशरूम सेना तक पहुंचा रहा है।
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सब्जी उत्पादकों की सहायता के लिए वाहन मुहैया करवाए गए हैं। सेना के साथ संपर्क कर मशरूम बेची जा रही है। अच्छे दाम दिलाए जा रहे हैं। मौजूदा समय में बड़ी मंडियों के माध्यम से फसल की बिक्री की जा रही है। - केके शर्मा, निदेशक, कृषि विभाग