जम्मू की नरवाल सब्जी मंडी में बिक्री न होने से रोजाना हजारों मीट्रिक टन सब्जियां खराब हो जा रही हैं। कोरोना कर्फ्यू के कारण दुकानें खुलने का समय सीमित कर दिया गया है, इससे दुकानदार और रेहड़ी वाले मंडी से ज्यादा सब्जी नहीं खरीद रहे। इससे मंडी में ही सब्जियां सड़ रही हैं।
ये दर्द रुला देगा: कोरोना की मार से किसान और दुकानदार परेशान, सड़ रहीं सब्जियों से तबाह हुई जिंदगी
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प्रशासन को दुकानें खोलने का समय बढ़ाना चाहिए। ऐसे ही घाटा होता रहा तो फिर मंडी खोलने का क्या फायदा। इस बारे में प्रशासन को अवगत करवाया गया है। कोरोना कर्फ्यू के बीच प्रदेश के 14 लाख से ज्यादा सब्जी उत्पादकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। मशरूम, आलू सहित अन्य सब्जियां अप्रैल में तैयार हो चुकी हैं, लेकिन मंडियों में दाम न मिलने से बिजाई-खाद के खर्च के अलावा मेहनत भी नहीं निकल पा रही। इस साल अब तक सब्जी उत्पादकों को करीब 10 करोड़ रुपये नुकसान उठाना पड़ा है।
बीते साल भी 30 करोड़ रुपये के आसपास नुकसान हुआ था। मौजूदा समय में तैयार मशरूम बेचने के लिए मंडी नहीं मिल पा रही। मंडियों में बेचा भी गया तो उम्मीद से कम दाम मिल रहे हैं। अब तैयार हो चुकी भिंडी, घिया, शिमला मिर्च, आलू, पालक और अन्य फसलों को भी लोकल मंडियां नहीं उठा रहीं। इससे उत्पादकों को नुकसान हो रहा है।
सब्जी मंडी नरवाल और श्रीनगर के अलावा दूसरी जगह सीधे तौर पर सब्जी नहीं खरीदी जा रही। हालांकि कृषि विभाग के माध्यम से सहायता पहुंचाई जा रही है। किसानों का सीधा संपर्क सीआरपीएफ, सेना और बीएसएफ से भी करवाया जा रहा है। सेना को मशरूम पहुंचाने में यातायात की दिक्कत आ रही थी। ऐसे में विभाग अपने वाहनों में कठुआ, जम्मू, सांबा समेत अन्य जिलों में मशरूम सेना तक पहुंचा रहा है।
सब्जी उत्पादकों की सहायता के लिए वाहन मुहैया करवाए गए हैं। सेना के साथ संपर्क कर मशरूम बेची जा रही है। अच्छे दाम दिलाए जा रहे हैं। मौजूदा समय में बड़ी मंडियों के माध्यम से फसल की बिक्री की जा रही है। - केके शर्मा, निदेशक, कृषि विभाग