फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जम्मू-कश्मीर: शहीद जवान का पार्थिक शरीर पहुंचा घर, बेटा और बेटियां उन्हें नींद से उठाने में जुटे रहे

Sun, 02 Sep 2018 06:48 PM IST
राजेश चन्द्र, अमर उजाला, जम्मू
राजेश चन्द्र, अमर उजाला, जम्मू Updated Sun, 02 Sep 2018 06:48 PM IST
विज्ञापन
COMMANDO OF INDIAN ARMY MARTYRED IN FOREST OF BANDIPURA JAMMU KASHMIR
शहीद शिव कुमार ठाकुर का बेटा और बेटियां उनके शव के पास जाकर उन्हें उठाने कि कोशिश करते हुए - फोटो : अमर उजाला
कमांडो शिव कुमार की शव यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान हर किसी की आंखों में आंसू दिखाई दिए। भारत माता की जय व शिव कुमार अमर रहे के नारे के साथ ही शहीद को पंचतत्व में विलीन किया। शहीद का उसके पैतृक गांव करूड़ इखाला पलमाड़ में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। बड़ी संख्या में सेना के अधिकारी व जिले के लोगों ने उसे अश्रुपूर्ण विदाई दी।


शव घर पहुंचने पर शहीद के बेटे और दोनों बेटियां उनके पार्थिक शरीर को हिलाकर उन्हें नींद से उठाने कि कोशिश में जुटे रहे।  इस बात से बेखबर थे कि उनके पिता अब कभी नहीं उठ सकेंगे। उधर उनकी पत्नी और मां बेसुद हो गए थे। शहीद शिव को रविवार शाम उनके पिता ने  मुखाग्नि दिया।  
COMMANDO OF INDIAN ARMY MARTYRED IN FOREST OF BANDIPURA JAMMU KASHMIR
शहीद शिव कुमार ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि 31 दिसंबर 1986 में जन्मे शिव कुमार पुत्र सोमनाथ निवासी करूड़ इखाला-पलमाड़ 31 अगस्त की शाम को कश्मीर के बांदीपोरा में आतंकियों के साथ लोहा लेते समय शहीद हुए। उनका पार्थिव शरीर रविवार को कश्मीर से हेलीकाप्टर से भंडारकूट पहुंचाया गया। जहां पर 9 सेक्टर के कमांडर रोहन आनंद व सेना के अन्य अधिकारियों ने उनके पार्थिव शरीर को हेलीकाप्टर से उतारा और अपने वाहन से गांव पहुंचाया। जहां पर हजारों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए मौजूद रहे।
COMMANDO OF INDIAN ARMY MARTYRED IN FOREST OF BANDIPURA JAMMU KASHMIR
शहीद शिव कुमार ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
इस वीर योद्धा व अपने परिवार को पालने वाले किसान के बेटे ने अपने पीछे माता-पिता, एक छोटे भाई, बड़ी बहन (विवाहित), पत्नी व दो बेटियों व एक पुत्र को छोड़ गया। शहीद की दो बेटियां राधिका (9), प्रिया व एक पुत्र गोलू किश्तवाड़ के एक निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं। इन्हें शनिवार को जैसे ही पिता के शहीद होने की खबर दी गई, तो उन्हें आसपास के लोगों ने सहारा दिया। शहीद की पत्नी पपी देवी सहित उन बच्चों को गांव करूड़ पहुंचाया, उन्हें विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि उनका पिता शहीद हुआ है। पहले उन्हें यह बताया था कि वह घायल हुए हैं, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि वह देश के काम आए हैं। आतंकियों के साथ लोहा लेते वह शहीद हुए हैं। उनके पिता सोमनाथ पेशे से किसान हैं। शिव कुमार उनके बुढ़ापे का सहारा था। दूसरा पुत्र प्राइवेट कंपनी में काम करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
COMMANDO OF INDIAN ARMY MARTYRED IN FOREST OF BANDIPURA JAMMU KASHMIR
शहीद शिव कुमार ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
शिव कुमार के काम से ब्रिगेड थी खुश
32 वर्षीय शहीद शिव कुमार 15 जैकलाई में था। जो 31 राष्ट्रीय रायफल (सीडीओ) कश्मीर में तैनात था। उनके काम से पूरी ब्रिगेड काफी खुश थी। उसकी तारीफ के पुल बांधे जाते थे। उसकी कद काठी को देखते वह काफी प्रसिद्ध भी थे। उनके शहीद होने की खबर से पूरे किश्तवाड़ में शोक है। सोशल मीडिया में उसके चित्र देखकर सभी कह रहे हैं कि कितना स्मार्ट था। बहुत कम लोग उसे जानते थे, लेकिन मीडिया में आने के बाद लोगों को काफी दुख हुआ है।
विज्ञापन
शहीद शिव कुमार ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
पार्थिव शरीर के पहुंचते ही लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा और भारत माता की जय व शिव कुमार अमर रहे के नारे लगाए जाने लगे। सेना के जवानों व इलाके को लोगों ने शहीद के पार्थिव शरीर को घर पहुंचाया। जहां पर उनके परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल था। उनके दर्शन करके अपने आपको लोगों ने खुद को धन्य समझा।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed