{"_id":"5b8bc8c242c79246664233a8","slug":"commando-of-indian-army-martyred-in-gunfight-in-forest-of-bandipura-jammu-kashmir","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर: तस्वीरों में दिखने वाला युवक था असल हीरो, देश के लिए लगा दी जान की बाजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर: तस्वीरों में दिखने वाला युवक था असल हीरो, देश के लिए लगा दी जान की बाजी
राजेश चन्द्र, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 02 Sep 2018 04:55 PM IST
विज्ञापन
शहीद शिव कुमार ठाकुर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह तस्वीर किसी बॉलीवुड स्टार कि नहीं बल्कि भारतीय सेना के एक जवान कि है। जिसने देश के लिए अपनी जान दाव पर लगा दी। उत्तरी कश्मीर के बांदीपुरा जिले के ऊपरी जंगल क्षेत्र में सेना ने एक ऑपरेशन के दौरान सेना का एक जवान शनिवार को शहीद हो गया जबकि 3 आतंकी मार गिए गए थे। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के रहने वाले शिव कुमार ठाकुर भारतीय सेना की 9 पैरा फोर्सेज में पोस्टेड था। मारे गए आतंकियों से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद भी बरामद हुआ है।
शहीद शिव कुमार ठाकुर
गौरतलब है कि 31 दिसंबर 1986 में जन्में इस देश के वीर शिव कुमार पुत्र सोमनाथ निवासी करूड़ इखाला-पलमाड़ ठीक 31 अगस्त की शाम को कश्मीर के बांडीपुरा में आतंकियों के साथ लोहा लेते समय शहीद हुए, जिसका पार्थिव शरीर आज कश्मीर से हेलीकाप्टर से भंडारकूट में पहुंचाया गया जहां पर 9 सेक्टर के कमांडर रोहन आनंद व अन्य सेना अधिकारियों ने उनके पार्थिव शरीर हेलीकाप्टर से उतारा और अपने ही वाहन से उसे पेतृक गांव पहुंचाया गया जहां पर हजारों लोग उनके इंतजार में थे, पार्थिव शरीर के पहुंचते ही लोगों का जनसेलाब उमड़ पड़ा और भारत माता की जय व शिव कुमार अमर रहे के नारे लगाए जाने लगे, सेना के जवानों व इलाके को लोगों ने पीर्थव शरीर को घर पहुंचाया, जहां पर उनके परिवार वालों की आंखे नम थी, उनके दर्शन करके अपने आप को लोगों ने खुद को धन्य समझा, क्योंकि बहुत कम ऐसे वीर होते हैं जो देश के काम आते हैं। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
शहीद शिव कुमार ठाकुर
श्रीनगर में सेना की 15वी कोर के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने बताया कि सेना ने बांदीपुरा ऑपरेशन के दौरान 3 आतंकियों को ढेर किया गया है। उन्होने बताया कि मारे गए आतंकियों से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद भी बरामद हुआ है। कर्नल कालिया ने बताया कि अभी फिलहाल मारे गए आतंकियों की शिनाख्त नहीं हो पाई है लेकिन सूत्रों की मानें तो मारे गए आतंकी विदेशी मूल के हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
शहीद शिव कुमार ठाकुर
इस वीर योधा व अपने परिवार को पालने वाले किसान के बेटे ने अपने पीछे माता-पिता, एक छोटे भाई,बड़ी बहन (विवाहित), पत्नी व दो बेटियों व एक पुत्र को पीछे छोड़ दिया और देश पर कुर्बान हुए। जानकारी मिली है कि इसकी दो बेटियां राधिका, प्रिया व एक पुत्र जिसे गोलु के नाम से लोग पुकारते हैं, जो कि किश्तवाड़ के एक निजी स्कूल में शिक्षा पा रहे थे। इन्हें शनिवार को जेसे ही पिता के शहीद होने की खबर दी गई, तो उन्हें किराए के मकान वालों ने ही सहारा दिया और उसकी पत्नी पपी देवी सहित उन बच्चों को गांव करूड़ पहुंचाया, उन्हें विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि उनका पिता शहीद हुआ है, वेसे तो पहले उन्हें यह बताया था कि वह घायल हुए हैं। परंतु बाद में उन्हें पता चला कि वह देश के काम आए हैं। आंतकियों के साथ लोहा लेते वह शहीद हुए हैं। हांलाकि बेटी की आयू लगभग 9 वर्ष से अधिक नहीं हैं। उनके पिता सोम नाथ पेशे से किसान हैं, यहीं पुत्र उनका एक मात्र कमाई का साधन था, दूसरा पुत्र किसी प्राईवेट कंपनी में काम करता है।
विज्ञापन
शहीद शिव कुमार ठाकुर
इस वीर योधा व अपने परिवार को पालने वाले किसान के बेटे ने अपने पीछे माता-पिता, एक छोटे भाई,बड़ी बहन (विवाहित), पत्नी व दो बेटियों व एक पुत्र को पीछे छोड़ दिया और देश पर कुर्बान हुए। जानकारी मिली है कि इसकी दो बेटियां राधिका, प्रिया व एक पुत्र जिसे गोलु के नाम से लोग पुकारते हैं, जो कि किश्तवाड़ के एक निजी स्कूल में शिक्षा पा रहे थे। इन्हें शनिवार को जेसे ही पिता के शहीद होने की खबर दी गई, तो उन्हें किराए के मकान वालों ने ही सहारा दिया और उसकी पत्नी पपी देवी सहित उन बच्चों को गांव करूड़ पहुंचाया, उन्हें विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि उनका पिता शहीद हुआ है, वेसे तो पहले उन्हें यह बताया था कि वह घायल हुए हैं। परंतु बाद में उन्हें पता चला कि वह देश के काम आए हैं। आंतकियों के साथ लोहा लेते वह शहीद हुए हैं। हांलाकि बेटी की आयू लगभग 9 वर्ष से अधिक नहीं हैं। उनके पिता सोम नाथ पेशे से किसान हैं, यहीं पुत्र उनका एक मात्र कमाई का साधन था, दूसरा पुत्र किसी प्राईवेट कंपनी में काम करता है।